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राजस्थान की झीलें, तालाब एवं जल संरक्षण

राजस्थान की खारी झीलें आंतरिक द्रोणियों में हैं, मीठे पानी की प्रसिद्ध झीलें स्थानीय शासकों, साहूकारों और बंजारों ने बनवाईं, और गाँव वर्षा-जल को खड़ीन, टांके, नाडी और बेरी में सहेजते थे।

⏱ 7 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 17 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. सांभर: भारत की सबसे बड़ी आंतरिक खारे पानी की झील।
  2. जयसमंद: एशिया की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील कही जाती है; राजस्थान पर्यटन के अपने पृष्ठ के शीर्षक में भारत की।
  3. डीडवाना: यहाँ का रोही (थेनार्डाइट), लगभग 90% सोडियम सल्फेट का भंडार, भारी रसायनों का कच्चा माल है।

खारे पानी की झीलें

झीलस्थाननमक एवं आकार
सांभरसांभर झील कस्बा, जयपुर जिला; झील पुराने नागौर जिले (अब डीडवाना-कुचामन, नावां के पास) में, कुछ भाग जयपुर जिले मेंनमकीन पानी (ब्राइन) से सामान्य नमक; औसत ब्राइन में 88% सोडियम क्लोराइड, 7.5% सोडियम सल्फेट और 4.5% सोडियम कार्बोनेट
डीडवानाडीडवाना (तब नागौर जिला, अब डीडवाना-कुचामन जिला)अंडाकार द्रोणी, 8.04 किमी लंबी और 6.4 किमी चौड़ी, सांभर से 64 किमी दूर; इसका नमक सोडियम सल्फेट से भरपूर और खाने के नमक के रूप में घटिया है, लगभग 80% सोडियम क्लोराइड
पचपदरापचपदरा (तब बाड़मेर जिला, अब बालोतरा जिला)लंबी अंडाकार द्रोणी, लगभग 12.8 किमी लंबी, 82.74 वर्ग किमी; 3.04 से 3.65 मीटर गहरे गड्ढों में रिसने वाले ब्राइन से सामान्य नमक; लगभग 1 लाख टन प्रतिवर्ष
लूणकरणसरलूणकरणसर, बीकानेर जिलालगभग 4.5 वर्ग किमी, बीकानेर से 72.4 किमी उत्तर-पूर्व में; भूमिगत ब्राइन से भरने वाले गड्ढों से सामान्य नमक
कुचामनकुचामन (तब नागौर जिला, अब डीडवाना-कुचामन जिला)सांभर, डीडवाना और सरगोट के साथ पुराने नागौर जिले की खारी झीलों में गिनी जाती है
तालछापरतालछापर, चूरू जिलासांभर, डीडवाना और कुचामन के साथ पश्चिम के आंतरिक अपवाह क्षेत्र की बड़ी खारी झीलों में गिनी जाती है
फलौदीफलौदी (तब जोधपुर जिला, अब फलौदी जिला)बाप के साथ 100 वर्ग किमी से अधिक का नमक क्षेत्र; उथले खोदे कुओं से पम्प किए ब्राइन से नमक

आकार और उत्पादन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की 2011 की रिपोर्ट के अनुसार हैं; उत्पादन हर साल बदलता है।

सांभर झील

लंबाई और चौड़ाईलगभग 35.5 किमी लंबी और 3 से 11 किमी चौड़ी
क्षेत्रफल (स्रोतों में अंतर)रामसर रिकॉर्ड (1990) में 24,000 हेक्टेयर; भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की 2011 की रिपोर्ट में 243 वर्ग किमी
सामान्य नमकलगभग 2 लाख टन प्रतिवर्ष (2011)
बाँधलगभग 5 किमी लंबा पत्थर का बाँध झील को बाँटता है; नमक बनाने के वाष्पीकरण-क्यारे इसके पूर्व में हैं
नामपरंपरा के अनुसार शाकम्भरी से, जो चौहानों की कुलदेवी हैं

मीठे पानी की झीलें

झीलस्थाननिर्माता एवं कालटिप्पणी
जयसमंद (ढेबर)सलूंबर के पास (तब उदयपुर जिला, अब सलूंबर)महाराणा जयसिंह, 1685 ई.गोमती नदी पर बाँध; 36 वर्ग किमी, 14 किमी लंबी और 9 किमी चौड़ी
राजसमंदराजसमंद, राजनगर और कांकरोली के बीचमहाराणा राजसिंह प्रथम, 1662 से 1676 ई.गोमती, केलवा और ताली नदियों पर बाँध
पिछौलाउदयपुरएक बंजारे (पिच्छू बंजारा) ने, महाराणा लाखा के समय में; बाद में महाराणा उदयसिंह द्वितीय ने इसे बड़ा करवायाटापुओं में जग निवास, जग मंदिर, मोहन मंदिर और आरसी विलास
फतहसागरउदयपुरमहाराणा जयसिंह, 1678 ई.; बाढ़ में मिट्टी की पाल बह जाने पर महाराणा फतहसिंह ने फिर बनवाईतीन टापू, सबसे बड़ा नेहरू टापू
आनासागरअजमेरअर्णोराज (आनाजी) चौहान, 1135 से 1150 ई.
फॉय सागरअजमेरअंग्रेज़ इंजीनियर मिस्टर फॉय, 1892 ई.अकाल राहत की मज़दूरी देने के लिए खुदवाई गई
पुष्करपुष्कर, अजमेर जिलाकिंवदंती के अनुसार जहाँ ब्रह्मा ने कमल गिराया वहाँ बनीअर्धवृत्ताकार, 8 से 10 मीटर गहरी, 52 स्नान घाट और 400 से अधिक मंदिर
नक्कीमाउंट आबू, सिरोही जिलापास में टॉड रॉक है
  • अन्य झीलें: बांकली बाँध (जालौर), टोरडीसागर (टोंक), सरदारसमंद (पाली) और नवलखा (बूँदी)।

राजस्थान के रामसर आर्द्रभूमि स्थल

  • केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर), 1 अक्टूबर 1981; सांभर, 23 मार्च 1990।
  • मेनार (उदयपुर) और खीचन (फलौदी) रामसर स्थल बने, जिसकी घोषणा 4 जून 2025 को हुई; इससे भारत में रामसर स्थल 91 हो गए।

परंपरागत जल-संरक्षण संरचनाएँ

संरचनाअर्थक्षेत्र
खड़ीनढलान के आर-पार बनी लंबी (100 से 300 मीटर) कच्ची या पक्की मेड़; इसमें रुका बहता पानी पीछे के खेत को भिगोता है, जिसमें रबी और खरीफ दोनों फसलें होती हैंजैसलमेर; मध्यकाल (15वीं शताब्दी) में पालीवाल ब्राह्मणों ने विकसित की
नाडीरेतीले मैदान के निचले भाग में बना गाँव का छोटा तालाब, जिसमें वर्षा-जल रुकता है; सामान्यतः 4 से 5 मीटर गहरी; मनुष्यों, पशुओं और वन्य जीवों के लिएअधिकतर पश्चिमी राजस्थान
टांकाघर या खेत में 5 से 6 मीटर गहरा खोदा गया ढका भूमिगत हौज, जो छत या आगोर के पानी से भरता है; पेयजल के लिएपश्चिमी राजस्थान, जैसे बीकानेर, फलौदी और बाड़मेर
कुंड (कुंडी)तश्तरीनुमा जलग्रहण क्षेत्र (आगोर) के बीच बना ढका गोल कुआँ, पेयजल के लिएथार के रेतीले भाग, पश्चिमी राजस्थान
बेरी (कुई)तालाब या खड़ीन के पास खोदा गया संकरा गड्ढा, जिसमें रिसाव का पानी जमा होता है; गर्मी में वर्षा-जल सूखने पर पीने के काम आता हैपश्चिमी राजस्थान, बाड़मेर और जैसलमेर
जोहड़मानसून के पानी का भंडार, जो मनुष्यों और पशुओं के काम आता है और भूजल भी बढ़ाता हैशेखावाटी और हरियाणा; अलवर
तालाबअधिकतर ढलान के पास बना बड़ा वर्षा-आधारित जलाशय, मनुष्यों और पशुओं के लिएहेमाबास (पाली), सरेरी व मेजा (भीलवाड़ा), बानकिया व सेनापानी (चित्तौड़गढ़), गड़ीसर व गजरूपसागर (जैसलमेर)
बावड़ीचौकोर, गोल या वर्तुल आकार का जल स्रोत, जिसमें पानी तक सीढ़ियाँ उतरती हैंप्रायः सभी जिलों में; अधिक बावड़ियों के कारण बूँदी को 'सिटी ऑफ स्टैप वेल्स' कहा जाता है
  • बेरी की गहराई (स्रोतों में अंतर): RBSE की पुस्तक में 5 से 6 मीटर गहरी और 2 से 3 फीट व्यास; केंद्रीय भूजल बोर्ड के एक शोध-पत्र में 10 से 12 मीटर; सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के अनुसार 5 से 12 मीटर।
  • जोहड़ का रूप (स्रोतों में अंतर): RBSE की पुस्तक में टांके जैसा पर बड़ा, गोल और खुला जलाशय; केंद्रीय भूजल बोर्ड के एक शोध-पत्र में ढलान के आर-पार बना छोटा, प्रायः अर्धवृत्ताकार मिट्टी का रोक-बाँध।

सरकारी जल-संरक्षण अभियान

  • जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन: 1 जून 2026 को शुरू, जिसमें जल संचय जन भागीदारी को जल शक्ति अभियान: कैच द रेन से जोड़ा गया; कैच द रेन विश्व जल दिवस, 22 मार्च 2021 को शुरू हुआ था (19 जुलाई 2026 की स्थिति)।
  • मिशन अमृत सरोवर: 24 अप्रैल 2022 को शुरू; हर अमृत सरोवर कम से कम एक एकड़ (0.4 हेक्टेयर) का और लगभग 10,000 घन मीटर क्षमता का तालाब बनाने की योजना है; चरण 2 सितंबर 2023 से चल रहा है (22 जनवरी 2026 की स्थिति)।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • डीडवाना या पचपदराडीडवाना सोडियम सल्फेट की झील है · पचपदरा के गड्ढों से सामान्य नमक मिलता है।
  • खड़ीन या बेरीखड़ीन भीगे हुए खेत में फसल देती है · बेरी उसके पास का संकरा गड्ढा है, जिसका पानी गर्मी में पीने के काम आता है।
  • नाडी या तालाबनाडी छोटा, कम गहरा तालाब है · तालाब उससे बड़ा जलाशय है।
  • फॉय सागर या आनासागरआनासागर चौहानकालीन झील है · फॉय सागर अंग्रेज़ों के समय की अकाल राहत झील।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 8

राजस्थान के किस जिले में 'खड़ीन' जल संरक्षण की प्रचलित विधि है ?

  1. (1)नागौर
  2. (2)बीकानेर
  3. (3)जैसलमेर
  4. (4)पाली
उत्तर देखें

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 72

पिचौला (पिछौला) झील, राजस्थान के निम्नलिखित में से किस स्थान में पायी जाती है?

  1. (1)उदयपुर
  2. (2)अजमेर
  3. (3)भीलवाड़ा
  4. (4)करौली
उत्तर देखें

संरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 39

'पक्षी गाँव' के नाम से प्रसिद्ध मेनार गाँव राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?

  1. (1)उदयपुर
  2. (2)जोधपुर
  3. (3)भरतपुर
  4. (4)झालावाड़
उत्तर देखें

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