एक नज़र में
- सांभर: भारत की सबसे बड़ी आंतरिक खारे पानी की झील।
- जयसमंद: एशिया की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील कही जाती है; राजस्थान पर्यटन के अपने पृष्ठ के शीर्षक में भारत की।
- डीडवाना: यहाँ का रोही (थेनार्डाइट), लगभग 90% सोडियम सल्फेट का भंडार, भारी रसायनों का कच्चा माल है।
खारे पानी की झीलें
| झील | स्थान | नमक एवं आकार |
|---|---|---|
| सांभर | सांभर झील कस्बा, जयपुर जिला; झील पुराने नागौर जिले (अब डीडवाना-कुचामन, नावां के पास) में, कुछ भाग जयपुर जिले में | नमकीन पानी (ब्राइन) से सामान्य नमक; औसत ब्राइन में 88% सोडियम क्लोराइड, 7.5% सोडियम सल्फेट और 4.5% सोडियम कार्बोनेट |
| डीडवाना | डीडवाना (तब नागौर जिला, अब डीडवाना-कुचामन जिला) | अंडाकार द्रोणी, 8.04 किमी लंबी और 6.4 किमी चौड़ी, सांभर से 64 किमी दूर; इसका नमक सोडियम सल्फेट से भरपूर और खाने के नमक के रूप में घटिया है, लगभग 80% सोडियम क्लोराइड |
| पचपदरा | पचपदरा (तब बाड़मेर जिला, अब बालोतरा जिला) | लंबी अंडाकार द्रोणी, लगभग 12.8 किमी लंबी, 82.74 वर्ग किमी; 3.04 से 3.65 मीटर गहरे गड्ढों में रिसने वाले ब्राइन से सामान्य नमक; लगभग 1 लाख टन प्रतिवर्ष |
| लूणकरणसर | लूणकरणसर, बीकानेर जिला | लगभग 4.5 वर्ग किमी, बीकानेर से 72.4 किमी उत्तर-पूर्व में; भूमिगत ब्राइन से भरने वाले गड्ढों से सामान्य नमक |
| कुचामन | कुचामन (तब नागौर जिला, अब डीडवाना-कुचामन जिला) | सांभर, डीडवाना और सरगोट के साथ पुराने नागौर जिले की खारी झीलों में गिनी जाती है |
| तालछापर | तालछापर, चूरू जिला | सांभर, डीडवाना और कुचामन के साथ पश्चिम के आंतरिक अपवाह क्षेत्र की बड़ी खारी झीलों में गिनी जाती है |
| फलौदी | फलौदी (तब जोधपुर जिला, अब फलौदी जिला) | बाप के साथ 100 वर्ग किमी से अधिक का नमक क्षेत्र; उथले खोदे कुओं से पम्प किए ब्राइन से नमक |
आकार और उत्पादन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की 2011 की रिपोर्ट के अनुसार हैं; उत्पादन हर साल बदलता है।
सांभर झील
| लंबाई और चौड़ाई | लगभग 35.5 किमी लंबी और 3 से 11 किमी चौड़ी |
|---|---|
| क्षेत्रफल (स्रोतों में अंतर) | रामसर रिकॉर्ड (1990) में 24,000 हेक्टेयर; भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की 2011 की रिपोर्ट में 243 वर्ग किमी |
| सामान्य नमक | लगभग 2 लाख टन प्रतिवर्ष (2011) |
| बाँध | लगभग 5 किमी लंबा पत्थर का बाँध झील को बाँटता है; नमक बनाने के वाष्पीकरण-क्यारे इसके पूर्व में हैं |
| नाम | परंपरा के अनुसार शाकम्भरी से, जो चौहानों की कुलदेवी हैं |
मीठे पानी की झीलें
| झील | स्थान | निर्माता एवं काल | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| जयसमंद (ढेबर) | सलूंबर के पास (तब उदयपुर जिला, अब सलूंबर) | महाराणा जयसिंह, 1685 ई. | गोमती नदी पर बाँध; 36 वर्ग किमी, 14 किमी लंबी और 9 किमी चौड़ी |
| राजसमंद | राजसमंद, राजनगर और कांकरोली के बीच | महाराणा राजसिंह प्रथम, 1662 से 1676 ई. | गोमती, केलवा और ताली नदियों पर बाँध |
| पिछौला | उदयपुर | एक बंजारे (पिच्छू बंजारा) ने, महाराणा लाखा के समय में; बाद में महाराणा उदयसिंह द्वितीय ने इसे बड़ा करवाया | टापुओं में जग निवास, जग मंदिर, मोहन मंदिर और आरसी विलास |
| फतहसागर | उदयपुर | महाराणा जयसिंह, 1678 ई.; बाढ़ में मिट्टी की पाल बह जाने पर महाराणा फतहसिंह ने फिर बनवाई | तीन टापू, सबसे बड़ा नेहरू टापू |
| आनासागर | अजमेर | अर्णोराज (आनाजी) चौहान, 1135 से 1150 ई. | |
| फॉय सागर | अजमेर | अंग्रेज़ इंजीनियर मिस्टर फॉय, 1892 ई. | अकाल राहत की मज़दूरी देने के लिए खुदवाई गई |
| पुष्कर | पुष्कर, अजमेर जिला | किंवदंती के अनुसार जहाँ ब्रह्मा ने कमल गिराया वहाँ बनी | अर्धवृत्ताकार, 8 से 10 मीटर गहरी, 52 स्नान घाट और 400 से अधिक मंदिर |
| नक्की | माउंट आबू, सिरोही जिला | पास में टॉड रॉक है |
- अन्य झीलें: बांकली बाँध (जालौर), टोरडीसागर (टोंक), सरदारसमंद (पाली) और नवलखा (बूँदी)।
राजस्थान के रामसर आर्द्रभूमि स्थल
- केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर), 1 अक्टूबर 1981; सांभर, 23 मार्च 1990।
- मेनार (उदयपुर) और खीचन (फलौदी) रामसर स्थल बने, जिसकी घोषणा 4 जून 2025 को हुई; इससे भारत में रामसर स्थल 91 हो गए।
परंपरागत जल-संरक्षण संरचनाएँ
| संरचना | अर्थ | क्षेत्र |
|---|---|---|
| खड़ीन | ढलान के आर-पार बनी लंबी (100 से 300 मीटर) कच्ची या पक्की मेड़; इसमें रुका बहता पानी पीछे के खेत को भिगोता है, जिसमें रबी और खरीफ दोनों फसलें होती हैं | जैसलमेर; मध्यकाल (15वीं शताब्दी) में पालीवाल ब्राह्मणों ने विकसित की |
| नाडी | रेतीले मैदान के निचले भाग में बना गाँव का छोटा तालाब, जिसमें वर्षा-जल रुकता है; सामान्यतः 4 से 5 मीटर गहरी; मनुष्यों, पशुओं और वन्य जीवों के लिए | अधिकतर पश्चिमी राजस्थान |
| टांका | घर या खेत में 5 से 6 मीटर गहरा खोदा गया ढका भूमिगत हौज, जो छत या आगोर के पानी से भरता है; पेयजल के लिए | पश्चिमी राजस्थान, जैसे बीकानेर, फलौदी और बाड़मेर |
| कुंड (कुंडी) | तश्तरीनुमा जलग्रहण क्षेत्र (आगोर) के बीच बना ढका गोल कुआँ, पेयजल के लिए | थार के रेतीले भाग, पश्चिमी राजस्थान |
| बेरी (कुई) | तालाब या खड़ीन के पास खोदा गया संकरा गड्ढा, जिसमें रिसाव का पानी जमा होता है; गर्मी में वर्षा-जल सूखने पर पीने के काम आता है | पश्चिमी राजस्थान, बाड़मेर और जैसलमेर |
| जोहड़ | मानसून के पानी का भंडार, जो मनुष्यों और पशुओं के काम आता है और भूजल भी बढ़ाता है | शेखावाटी और हरियाणा; अलवर |
| तालाब | अधिकतर ढलान के पास बना बड़ा वर्षा-आधारित जलाशय, मनुष्यों और पशुओं के लिए | हेमाबास (पाली), सरेरी व मेजा (भीलवाड़ा), बानकिया व सेनापानी (चित्तौड़गढ़), गड़ीसर व गजरूपसागर (जैसलमेर) |
| बावड़ी | चौकोर, गोल या वर्तुल आकार का जल स्रोत, जिसमें पानी तक सीढ़ियाँ उतरती हैं | प्रायः सभी जिलों में; अधिक बावड़ियों के कारण बूँदी को 'सिटी ऑफ स्टैप वेल्स' कहा जाता है |
- बेरी की गहराई (स्रोतों में अंतर): RBSE की पुस्तक में 5 से 6 मीटर गहरी और 2 से 3 फीट व्यास; केंद्रीय भूजल बोर्ड के एक शोध-पत्र में 10 से 12 मीटर; सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के अनुसार 5 से 12 मीटर।
- जोहड़ का रूप (स्रोतों में अंतर): RBSE की पुस्तक में टांके जैसा पर बड़ा, गोल और खुला जलाशय; केंद्रीय भूजल बोर्ड के एक शोध-पत्र में ढलान के आर-पार बना छोटा, प्रायः अर्धवृत्ताकार मिट्टी का रोक-बाँध।
सरकारी जल-संरक्षण अभियान
- जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन: 1 जून 2026 को शुरू, जिसमें जल संचय जन भागीदारी को जल शक्ति अभियान: कैच द रेन से जोड़ा गया; कैच द रेन विश्व जल दिवस, 22 मार्च 2021 को शुरू हुआ था (19 जुलाई 2026 की स्थिति)।
- मिशन अमृत सरोवर: 24 अप्रैल 2022 को शुरू; हर अमृत सरोवर कम से कम एक एकड़ (0.4 हेक्टेयर) का और लगभग 10,000 घन मीटर क्षमता का तालाब बनाने की योजना है; चरण 2 सितंबर 2023 से चल रहा है (22 जनवरी 2026 की स्थिति)।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- डीडवाना या पचपदराडीडवाना सोडियम सल्फेट की झील है · पचपदरा के गड्ढों से सामान्य नमक मिलता है।
- खड़ीन या बेरीखड़ीन भीगे हुए खेत में फसल देती है · बेरी उसके पास का संकरा गड्ढा है, जिसका पानी गर्मी में पीने के काम आता है।
- नाडी या तालाबनाडी छोटा, कम गहरा तालाब है · तालाब उससे बड़ा जलाशय है।
- फॉय सागर या आनासागरआनासागर चौहानकालीन झील है · फॉय सागर अंग्रेज़ों के समय की अकाल राहत झील।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 8
राजस्थान के किस जिले में 'खड़ीन' जल संरक्षण की प्रचलित विधि है ?
- (1)नागौर
- (2)बीकानेर
- (3)जैसलमेर
- (4)पाली
उत्तर देखें
✓ (3) जैसलमेर
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 72
पिचौला (पिछौला) झील, राजस्थान के निम्नलिखित में से किस स्थान में पायी जाती है?
- (1)उदयपुर
- (2)अजमेर
- (3)भीलवाड़ा
- (4)करौली
उत्तर देखें
✓ (1) उदयपुर
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 39
'पक्षी गाँव' के नाम से प्रसिद्ध मेनार गाँव राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?
- (1)उदयपुर
- (2)जोधपुर
- (3)भरतपुर
- (4)झालावाड़
उत्तर देखें
✓ (1) उदयपुर
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