एक नज़र में
- क्षेत्रफल में चारों प्रदेशों में सबसे बड़ा: पश्चिमी मरुस्थल (थार)।
- अरावली दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व तक फैली है और राज्य को दो असमान भागों में बाँटती है: पश्चिम में शुष्क से अर्द्धशुष्क, पूर्व में अर्द्धशुष्क से उप-आर्द्र।
- महान सीमा भ्रंश (ग्रेट बाउंड्री फ़ॉल्ट) अरावली की चट्टानों को उनके पूर्व की विंध्यन चट्टानों से अलग करता है।
चार भौतिक प्रदेश
- पश्चिमी मरुस्थल (थार)बालुका-स्तूप व शुष्क मैदानभागशुष्क रेतीला अथवा मरुस्थली प्रदेश; लूनी–जवाई बेसिन; शेखावाटी प्रदेश; घग्घर का मैदानमुख्य विशेषताएँअरावली के पश्चिम में; शुष्क एवं अर्द्धशुष्क; 'भारत का विशाल मरुस्थल' भी कहलाता हैक्षेत्रफल व जनसंख्या में हिस्सालगभग 61% क्षेत्रफल और लगभग 40% जनसंख्या (2011); घनत्व 130 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी, राज्य में सबसे कमपूरे नोट्स पढ़ें →
- अरावली पर्वतीय प्रदेशप्राचीन वलित पर्वतभागदक्षिणी, मध्य और उत्तरी अरावलीमुख्य विशेषताएँदक्षिण में सबसे सघन और ऊँची; उत्तर में दूर-दूर बिखरी पहाड़ियाँपूरे नोट्स पढ़ें →
- पूर्वी मैदाननदी निर्मित मैदानभागबनास–बाणगंगा बेसिन; चम्बल बेसिन; मध्य माही बेसिन (छप्पन का मैदान)मुख्य विशेषताएँअरावली के पूर्व में; नदियों द्वारा जमा की गई मिट्टी से बना; बनास–बाणगंगा का मैदान 150–300 मीटर ऊँचा है और ढाल पूर्व की ओर है; प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा के बीच 56 गाँवों के समूह के कारण 'छप्पन का मैदान' नाम पड़ाक्षेत्रफल व जनसंख्या में हिस्सालगभग 20% क्षेत्रफल और 33% जनसंख्या (2011), घनत्व 332 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी, राज्य में सर्वाधिक (RBSE); 23.3% क्षेत्रफल (एल.आर. भल्ला)
- दक्षिणी-पूर्वी पठार (हाड़ौती)मालवा पठार का विस्तारभागकोटा, बूँदी, झालावाड़ और बारां जिले (RBSE); भल्ला चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के कुछ भाग भी जोड़ते हैंमुख्य विशेषताएँऔसत ऊँचाई 500 मीटर; मुकुन्दरा और बूँदी की पहाड़ियाँ; चम्बल, कालीसिंध, परवन और पार्वती नदियाँ यहाँ बहती हैंक्षेत्रफल व जनसंख्या में हिस्सा9.6% क्षेत्रफल (एल.आर. भल्ला)
ऊँचाई के क्षेत्र
| समुद्र तल से ऊँचाई | राज्य का अनुपात | कहाँ है |
|---|---|---|
| 900 मीटर से अधिक | 1% से भी कम | अरावली के ऊँचे शिखर, जिनमें गुरुशिखर भी है |
| 600–900 मीटर | लगभग 6% | अरावली श्रेणियाँ; सिरोही, उदयपुर और राजसमंद से अजमेर तक सर्वाधिक विस्तार, जयपुर और अलवर की ओर ये टूटती जाती हैं |
| 300–600 मीटर | लगभग 31% | अरावली के दोनों ओर उच्च भूमि और पठार; उत्तर-पूर्वी भाग प्रायः समतल है (औसत ऊँचाई 400 मीटर), दक्षिण-पश्चिमी भाग उबड़-खाबड़ उच्च भूमि है (औसत 500 मीटर); दक्षिण-पूर्व में हाड़ौती का पठार है |
| 150–300 मीटर | लगभग 51% | पश्चिमी रेतीला मैदान और पूर्वी मैदान (बनास, चम्बल और छप्पन बेसिन) |
चट्टानी संरचना
| संरचना | क्या है |
|---|---|
| बैंडेड नाइसिक कॉम्प्लेक्स (BGC) | सबसे प्राचीन (आर्कियन) चट्टानें; अरावली और दिल्ली चट्टानों का आधार |
| अरावली सुपरग्रुप | प्रारंभिक प्रोटेरोज़ोइक कल्प की रूपांतरित अवसादी चट्टानें (क्वार्ट्ज़ाइट, फ़िलाइट आदि) और कुछ ज्वालामुखीय चट्टानें, जो BGC पर असंगत रूप से टिकी हैं |
| दिल्ली सुपरग्रुप | वह वलित पट्टी जो अरावली पर्वतमाला की रीढ़ बनाती है |
| मालानी चट्टानें | ज्वालामुखीय चट्टानें, मुख्यतः मालानी रायोलाइट |
| मारवाड़ सुपरग्रुप | अरावली के पश्चिम का स्थिर बेसिन, मालानी चट्टानों के ऊपर; अरावली के पास की प्रीकैम्ब्रियन चट्टानों में सबसे नई |
| विंध्यन सुपरग्रुप | अरावली के पूर्व का स्थिर बेसिन; संगुटिकाश्म, शेल, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर |
| डेक्कन ट्रैप | क्रिटेशियस से पैलियोसीन काल का बेसाल्ट लावा; हाड़ौती पठार का एक भाग दक्कन लावा का है |
पुरानी पुस्तकें अरावली और दिल्ली की चट्टानों को 'क्रम' या 'तंत्र' कहती हैं (हेरोन की योजना, जिसमें दोनों के बीच रायलो श्रेणी है); बाद के शोध में इन्हें सुपरग्रुप कहा गया है। सभी दिल्ली बेसिनों के लिए अब भी कोई एक मान्य क्रम नहीं है।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- बांगर, बागर, वागड़भल्ला पूरे अर्द्धशुष्क भाग को 'राजस्थान बांगर' कहते हैं (RPSC के हिंदी प्रश्नपत्र में 'राजस्थान बागड़') · RBSE शेखावाटी प्रदेश को 'बागर प्रदेश' कहती है · पहाड़ियों वाले मध्य माही (छप्पन) मैदान को RBSE 'वागड़' कहती है (भल्ला: 'बागड़')।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (सीनियर सैकण्डरी स्तर) 2024 · प्रश्न 53
निम्नलिखित में से राजस्थान का सबसे बड़ा भौगोलिक क्षेत्र (क्षेत्रफल के अनुसार) कौन सा है?
- (1)अर्ध शुष्क क्षेत्र
- (2)अरावली क्षेत्र
- (3)पश्चिमी मरुस्थलीय मैदानी क्षेत्र
- (4)पूर्वी मैदानी क्षेत्र
उत्तर देखें
✓ (3) पश्चिमी मरुस्थलीय मैदानी क्षेत्र
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