एक नज़र में
- प्राचीन नाम चर्मण्वती; कामधेनु भी कहलाती है।
- चम्बल के बीहड़: सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर में।
- सिंचाई और जल-विद्युत दोनों के लिए बाँध: राणा प्रताप सागर, CET स्नातक 2024 का उत्तर।
तथ्य
| उद्गम | मध्य प्रदेश में महू के दक्षिण में मानपुर (इंदौर जिला) के निकट जनापाव पहाड़ी (भल्ला के अनुसार 616 मीटर) |
|---|---|
| राजस्थान में प्रवेश | चौरासीगढ़ (चित्तौड़गढ़ जिला) के निकट, एक गार्ज में जो कोटा तक चलता है: भूजल विभाग के एटलस के अनुसार लगभग 96 किमी, भल्ला के अनुसार 113 किमी |
| कुल लंबाई | 900 किमी (बाढ़ कार्य योजना 2024) · 966 किमी (भल्ला) |
| राजस्थान में लंबाई | भूजल विभाग का एटलस: राजस्थान के भीतर लगभग 226 किमी, फिर मध्य प्रदेश-राजस्थान की सीमा के रूप में लगभग 252 किमी · भल्ला: राजस्थान के भीतर 135 किमी और सीमा के रूप में लगभग 241 किमी |
| मार्ग के जिले | चित्तौड़गढ़; कोटा और बूँदी की सीमा; सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर |
| कहाँ मिलती है | उत्तर प्रदेश में भरेह के पास पचनदा पर यमुना में (बाढ़ कार्य योजना 2024); मुरादगंज के निकट (भल्ला) |
| राजस्थान में बेसिन | लगभग 31,239 वर्ग किमी, बनास बेसिन को छोड़कर |
राजस्थान में प्रवाह मार्ग
- चौरासीगढ़ से कोटा तक: नदी गार्ज में बहती है; भैंसरोड़गढ़ के निकट बामनी मिलती है और लगभग 5 किमी आगे चूलिया जलप्रपात है।
- रामेश्वर पर इसमें बनास मिलती है, फिर यह उत्तर-पूर्व में राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा बनाती हुई बहती है।
सहायक नदियाँ
| सहायक नदी | उद्गम | चम्बल में मिलने का स्थान | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| बनास | रामेश्वर पर | ||
| कालीसिंध | मध्य प्रदेश में देवास के निकट | झालावाड़ और बारां में बहकर नानेरा के निकट | इसकी अपनी सहायक नदियाँ: परवन, उजाड़, निवाज, आहू |
| पार्वती | मध्य प्रदेश का सिहोर क्षेत्र | बारां में बहकर सवाई माधोपुर में पालिया के निकट | |
| बामनी (ब्राह्मणी) | चित्तौड़गढ़ में हरिपुर गाँव के निकट | भैंसरोड़गढ़ के निकट | |
| मेज | भीलवाड़ा | बूँदी में लाखेरी के निकट | |
| कुराल | उपरमाल का पठार | बूँदी के पूर्व में बहकर |
बाँध और बैराज
| संरचना | स्थान | टिप्पणी |
|---|---|---|
| गाँधी सागर | भानपुरा तहसील, मध्य प्रदेश, चौरासीगढ़ से लगभग 8 किमी | कोटा बैराज के साथ चम्बल परियोजना का प्रथम चरण; 1960 में बना |
| राणा प्रताप सागर | रावतभाटा, चूलिया जलप्रपात के निकट, गाँधी सागर से लगभग 48 किमी नीचे | 1970 तक पूरा हुआ |
| जवाहर सागर (कोटा बाँध) | बोराबास गाँव के निकट, राणा प्रताप सागर से लगभग 33 किमी नीचे | पिक-अप बाँध: इसका विद्युत गृह ऊपर के दो बाँधों से छोड़े गए जल का उपयोग करता है |
| कोटा बैराज | कोटा नगर के निकट, जवाहर सागर से लगभग 16 किमी नीचे | दाईं नहर मध्य प्रदेश को और बाईं नहर राजस्थान में जाती है |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- नदी के प्रवाह की दिशा में बाँधों का क्रम: गाँधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर, कोटा बैराज · निर्माण के चरण: प्रथम चरण में गाँधी सागर और कोटा बैराज, द्वितीय में राणा प्रताप सागर, तृतीय में जवाहर सागर।
- संयुक्त परियोजनाएँचम्बल परियोजना राजस्थान और मध्य प्रदेश की है · माही बजाज सागर राजस्थान और गुजरात की।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 138
राजस्थान में निम्नलिखित में से कौन सा बांध है जिसका सिंचाई और जल विद्युत दोनों के लिए उपयोग किया जाता है? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
- (1)राम सागर बांध
- (2)राणा प्रताप सागर बांध
- (3)मेजा बांध
- (4)जवाई बांध
उत्तर देखें
✓ (2) राणा प्रताप सागर बांध
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंपढ़ लिया? अब अभ्यास करें
निःशुल्क अभ्यास प्रश्नों से इस विषय पर अपनी तैयारी जाँचें।
अभ्यास प्रश्न →