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इंदिरा गांधी नहर

इंदिरा गांधी नहर (इंदिरा गांधी नहर परियोजना, IGNP) पंजाब की नदियों का जल उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के थार मरुस्थल तक पहुँचाती है। परीक्षा में पूछा जाता है कि यह कहाँ समाप्त होती है, इसके चरण कौन-से हैं और यह किन जिलों को लाभ देती है।

⏱ 3 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 20 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. जल हरिके बैराज से आता है, जो पंजाब में सतलज और ब्यास के संगम पर है।
  2. मुख्य नहर जैसलमेर जिले में मोहनगढ़ के निकट समाप्त होती है (CET स्नातक 2024 में पूछा गया)।
  3. रूपरेखा 1948 में बीकानेर रियासत के मुख्य अभियंता कंवर सेन ने रखी; 2 नवंबर 1984 तक यह राजस्थान नहर परियोजना कहलाती थी, फिर इंदिरा गांधी की स्मृति में इसका नाम बदला गया।

तथ्य

शिलान्यास31 मार्च 1958, तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री गोविन्द बल्लभ पंत द्वारा
राजस्थान फीडर204 किमी: लगभग 169 किमी पंजाब और हरियाणा में, फिर 35 किमी राजस्थान में मसीतावाली हैड (तब गंगानगर जिला, अब हनुमानगढ़) तक, जहाँ से मुख्य नहर शुरू होती है
जिलेश्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर, चूरू और जोधपुर (जोधपुर और बाड़मेर से बाद में फलौदी और बालोतरा जिले बने)
संपूर्ण परियोजनालगभग 15 लाख हेक्टेयर (1,500,000 हेक्टेयर) की सिंचाई संभव

दो चरण

चरणमुख्य नहरशाखा और वितरण नहरेंसिंचित होने वाला क्षेत्र (स्रोतों में अंतर)शाखाएँ और कार्य
प्रथम चरण189 किमी, मसीतावाली से पूगल (बीकानेर जिला) से 20 किमी दूर सत्तासर गाँव के निकट तकलगभग 2,950 किमी5.25 लाख हेक्टेयर (JICA, 2003) · 5.36 लाख हेक्टेयर (भल्ला, 1989)सूरतगढ़, अनूपगढ़ और पूगल शाखाएँ; लूणकरणसर–बीकानेर उठाव नहर
द्वितीय चरण256 किमी, सत्तासर से मुख्य नहर के अंत तक, जो मसीतावाली से 445 किमी हैलगभग 5,000 किमी (JICA, 2003) · 5,830 किमी (भल्ला, 1989)10.12 लाख हेक्टेयरशहीद सागरमल गोपा शाखा; उठाव नहरें; कार्य 1972–73 में शुरू हुआ

उठाव नहरें और अन्य उपयोग

  • लूणकरणसर–बीकानेर उठाव नहर (प्रथम चरण): चार पंपिंग स्टेशन जल को 60 मीटर ऊँचा उठाते हैं; इससे लगभग 51,000 हेक्टेयर की सिंचाई हो सकती है और बीकानेर व आसपास के क्षेत्रों को पेयजल व उद्योगों के लिए जल मिलता है।
  • 1980 के दशक की योजना के अनुसार द्वितीय चरण की उठाव नहरें: सहावा (गंगानगर और चूरू के लिए), कोलायत और गजनेर (बीकानेर), फलौदी (तब जोधपुर जिला, अब फलौदी) और पोकरण (जैसलमेर); ये जल को 60 मीटर तक उठाकर तत्कालीन श्रीगंगानगर, चूरू, बीकानेर, जोधपुर और जैसलमेर जिलों की लगभग 3.12 लाख हेक्टेयर भूमि सींचने के लिए थीं।
  • हनुमानगढ़ जिला: नहर टिब्बी, हनुमानगढ़, पीलीबंगा और रावतसर तहसीलों को सींचती है।
  • पेयजल: जल जीवन मिशन की एक योजना से नहर का जल सीकर और झुंझुनूं के शेष गाँवों और कस्बों तक पहुँचाया जाना है (जुलाई 2024 में इसके 2026 तक पूरा होने की संभावना बताई गई थी), और JICA की सहायता वाली एक परियोजना (ऋण समझौता 28 सितंबर 2012) इसे तत्कालीन नागौर जिले के दक्षिणी और पूर्वी भाग तक पहुँचाती है।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • 649 किमीRBSE इसे नहर की कुल लंबाई बताती है · भल्ला (1989) इसे बाड़मेर के गडरा रोड तक बढ़ाई गई मुख्य नहर की लंबाई बताते हैं, जो पहले जैसलमेर के रामगढ़ तक 445 किमी प्रस्तावित थी।
  • पुरानी पुस्तकों में गंगानगरहनुमानगढ़ जिला 12 जुलाई 1994 को श्रीगंगानगर से अलग बना, इसलिए पुरानी पुस्तकें पूरे क्षेत्र के लिए गंगानगर लिखती हैं।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 90

निम्न में से कौन इंदिरा गांधी नहर परियोजना का प्रस्तावित लाभार्थी जिला नहीं है?

  1. (1)पाली
  2. (2)सीकर
  3. (3)नागौर
  4. (4)जोधपुर
उत्तर देखें

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 57

इंदिरा गांधी नहर निम्नलिखित में से राजस्थान के किस जिले में समाप्त होती है?

  1. (1)जोधपुर
  2. (2)जैसलमेर
  3. (3)भरतपुर
  4. (4)उदयपुर
उत्तर देखें

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