एक नज़र में
- नियुक्ति समिति (धारा 15(3)): मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री; इसकी सिफारिश पर राज्यपाल नियुक्ति करता है।
- जन सूचना अधिकारी पर शास्ति: प्रतिदिन 250 रुपये, कुल अधिकतम 25,000 रुपये (धारा 20(1))।
- सदस्य: एक राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम दस राज्य सूचना आयुक्त (धारा 15(2))।
तथ्य
| कानून | सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, अध्याय 4, धाराएँ 15-17 |
|---|---|
| गठन | राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा (धारा 15(1)) |
| पात्रता | विधि, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जन-माध्यम या प्रशासन और शासन में व्यापक ज्ञान व अनुभव वाले सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठित व्यक्ति (15(5)) |
| अयोग्य | संसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य, लाभ का पद धारण करने वाला, राजनीतिक दल से जुड़ा या कारोबार/व्यवसाय करने वाला (15(6)) |
| संस्था का प्रमुख | राज्य मुख्य सूचना आयुक्त; सामान्य अधीक्षण, निदेशन और प्रबंधन उसके पास (15(4)) |
| मुख्यालय | राज्य सरकार जिस स्थान को अधिसूचना से निर्दिष्ट करे (15(7)) |
| कार्यकाल | तीन वर्ष (सूचना का अधिकार नियम, 2019 का नियम 12); 65 वर्ष की आयु के बाद कोई पद पर नहीं रहता (धारा 16) |
| वेतन और सेवा-शर्तें | धारा 16(5) में 2019 के संशोधन के बाद केन्द्र सरकार निर्धारित करती है |
| विनियम | राजस्थान सूचना आयोग (प्रबन्ध) विनियम, 2007, धारा 15(4) के अंतर्गत |
पद से हटाना (धारा 17)
- सिद्ध कदाचार या अक्षमता: राज्यपाल के संदर्भ पर सर्वोच्च न्यायालय की जाँच और प्रतिवेदन के बाद राज्यपाल के आदेश से हटाया जाता है।
- जाँच के दौरान राज्यपाल उसे निलंबित कर सकता है।
- बिना जाँच के राज्यपाल उसे हटा सकता है जो दिवालिया घोषित हो, नैतिक अधमता के अपराध में दोषसिद्ध हो, पद के बाहर वेतनभोगी नियोजन करे, शारीरिक/मानसिक अशक्त हो, या ऐसा हित अर्जित करे जो उसके कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले।
शिकायत, अपील और शास्ति
- धारा 18: सूचना न पाने वाले व्यक्तियों की शिकायतें प्राप्त कर उनकी जाँच करना।
- धारा 19(3): प्रथम अपीलीय अधिकारी के निर्णय के विरुद्ध आयोग में द्वितीय अपील।
- धारा 20(1): शास्ति उस जन सूचना अधिकारी पर लगती है जो बिना उचित कारण आवेदन लेने से इनकार करे, समय पर सूचना न दे, द्वेषपूर्वक मना करे, गलत या भ्रामक सूचना दे या सूचना नष्ट करे; पहले उसकी सुनवाई होती है और उचित रूप से कार्य करना उसे सिद्ध करना होता है।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- समिति का आकारसूचना आयोग में तीन (मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, मुख्यमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री) · मानवाधिकार आयोग में चार (मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, गृह मंत्री, नेता प्रतिपक्ष); उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश किसी में नहीं।
- कौन हटाता हैसूचना आयुक्तों को राज्यपाल · आरपीएससी और मानवाधिकार आयोग के सदस्यों को राष्ट्रपति।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 64
राजस्थान राज्य सूचना आयोग सूचना नहीं देने पर अधिकतम कितनी राशि का जुर्माना आरोपित कर सकता है?
- (1)15,000
- (2)20,000
- (3)25,000
- (4)30,000
उत्तर देखें
✓ (3) 25,000
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 36
राज्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा एक समिति की सिफ़ारिश पर की जाती है। निम्नलिखित में से कौन इस समिति का सदस्य नहीं होता है ?
- (1)मुख्यमंत्री
- (2)राज्य विधान सभा में विपक्ष का नेता
- (3)मुख्यमंत्री द्वारा मनोनीत केबिनेट मंत्री
- (4)उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
उत्तर देखें
✓ (4) उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 22
निम्नलिखित कथनों को ध्यान से पढ़ें : कथन 1 : राजस्थान सूचना आयोग (प्रबंधन) विनियम, 2007 को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15(4) के तहत बनाया गया था। कथन 2 : राजस्थान सूचना आयोग लोक सूचना अधिकारी पर प्रतिदिन 250 रुपये और अधिकतम 50,000 रुपये की शास्ति अधिरोपित कर सकता है। निम्नलिखित में से सही विकल्प का चयन करें :
- (1)केवल कथन 1 सत्य है।
- (2)केवल कथन 2 सत्य है।
- (3)कथन 1 और 2 सत्य हैं।
- (4)कथन 1 और 2 असत्य हैं।
उत्तर देखें
✓ (1) केवल कथन 1 सत्य है।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंपढ़ लिया? अब अभ्यास करें
निःशुल्क अभ्यास प्रश्नों से इस विषय पर अपनी तैयारी जाँचें।
अभ्यास प्रश्न →