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जिला प्रशासन

राज्य का प्रशासन ज़मीनी स्तर पर संभाग, जिले, उपखंड और तहसील के माध्यम से चलता है। राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 हर स्तर का अधिकारी तय करता है और बताता है कि कौन किसके अधीन है।

⏱ 6 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 23 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट एक ही अधिकारी है: भू-राजस्व अधिनियम के अंतर्गत वह जिले का कलेक्टर और भू-अभिलेख अधिकारी है; भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अंतर्गत वह जिला मजिस्ट्रेट है, जिसके अधीन जिले के सभी कार्यपालक मजिस्ट्रेट होते हैं।
  2. अधीनता का क्रम (भू-राजस्व अधिनियम की धारा 24): संभागीय आयुक्त, कलेक्टर, उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार; संभाग के सभी राजस्व अधिकारी संभागीय आयुक्त के अधीन होते हैं।
  3. अधिनियम की धारा 15 और 16 के अंतर्गत राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा संभाग, जिले, उपखंड, तहसील और उप-तहसील बनाती, समाप्त करती या उनकी सीमाएँ बदलती है।
  4. संभाग 1962 में अधिनियम से हटा दिए गए (राजस्थान अधिनियम 8, 1962) और 31 जनवरी 1987 से संभागीय आयुक्तों सहित पुनः स्थापित किए गए (राजस्थान अधिनियम 10, 1987)।

प्रशासन के स्तर

इकाईप्रमुखसंख्या
संभागसंभागीय आयुक्त7 (29 जनवरी 2025 की स्थिति)
जिलाजिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट41 (22 जनवरी 2026 की स्थिति)
उपखंडउपखंड अधिकारी (SDO)323 (22 जनवरी 2026 की स्थिति)
तहसीलतहसीलदार425 (22 जनवरी 2026 की स्थिति)
उप-तहसीलतहसीलदार या नायब तहसीलदार233 (22 जनवरी 2026 की स्थिति)
भू-अभिलेख निरीक्षक वृत्तगिरदावर कानूनगो (भू-अभिलेख निरीक्षक)
पटवार मंडलपटवारी

इन संख्याओं में 31 दिसंबर 2025 की वे अधिसूचनाएँ शामिल हैं, जिनसे बाड़मेर और बालोतरा जिलों के बीच तहसीलें बदली गईं; जिलों की संख्या 41 ही रही। जिलों और संभागों की सूची के लिए राजस्थान की स्थिति एवं जिले वाला पृष्ठ देखें।

संभागीय आयुक्त

विधिराजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 17: प्रत्येक संभाग में एक आयुक्त, और एक या अधिक संभागों के लिए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त आयुक्त
क्षेत्रसंभाग एक जिला या कई जिलों का समूह होता है, जैसा राज्य सरकार तय करे (धारा 15)

जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट

  • राजस्व: भू-राजस्व अधिनियम की धारा 20 के अनुसार प्रत्येक जिले में एक कलेक्टर होता है। उसे उपखंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर और तहसीलदार की सभी शक्तियाँ प्राप्त हैं (धारा 27)।
  • मजिस्ट्रेट: राज्य सरकार हर जिले में कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त करती है और उनमें से एक को जिला मजिस्ट्रेट बनाती है (संहिता की धारा 14)। उपद्रव या आशंकित खतरे के अत्यावश्यक मामलों में जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से सशक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट लिखित आदेश दे सकता है (धारा 163); यह आदेश अधिकतम दो महीने रहता है, और राज्य सरकार इसे छह महीने तक और बढ़ा सकती है।
  • आपदा प्रबंधन: वह जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का पदेन अध्यक्ष है, जिसे राज्य सरकार आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 25 के अंतर्गत हर जिले के लिए गठित करती है। स्थानीय प्राधिकरण का निर्वाचित प्रतिनिधि इसका पदेन सह-अध्यक्ष होता है; जहाँ जिला परिषद है, वहाँ उसका अध्यक्ष (जिला प्रमुख) सह-अध्यक्ष होता है।
  • चुनाव: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13AA के अंतर्गत निर्वाचन आयोग राज्य सरकार के परामर्श से प्रत्येक जिले के लिए एक सरकारी अधिकारी को जिला निर्वाचन अधिकारी नामित करता है।

किसी जिले या दो अथवा अधिक जिलों के लिए एक अतिरिक्त कलेक्टर नियुक्त किया जा सकता है (भू-राजस्व अधिनियम की धारा 20)। संहिता के अंतर्गत राज्य सरकार किसी भी कार्यपालक मजिस्ट्रेट को अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट बना सकती है, जिसे जिला मजिस्ट्रेट की वे शक्तियाँ मिलती हैं जो राज्य सरकार निर्देशित करे।

पुलिस अधीक्षक

राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 (2007 का अधिनियम 14) की धारा 16 के अंतर्गत राज्य सरकार किसी पुलिस जिले के लिए जिला पुलिस अधीक्षक नियुक्त कर सकती है। पुलिस महानिदेशक के समग्र नियंत्रण के अधीन जिले के पुलिस बल का नियंत्रण, पर्यवेक्षण और निर्देशन उसमें निहित है। अखिल भारतीय सेवा नियमों के अधीन उसका न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष है; इससे पहले हटाने के आधार यही धारा बताती है, जैसे दोषसिद्धि, बड़ा दंड, निलंबन, अक्षमता, स्वयं का अनुरोध या लिखित में दर्ज प्रशासनिक आवश्यकता।

महानगर क्षेत्र में यह पद पुलिस उपायुक्त कहलाता है। उसकी सहायता के लिए अतिरिक्त, उप या सहायक पुलिस अधीक्षक नियुक्त किए जा सकते हैं।

उपखंड अधिकारी, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार

  • उपखंड अधिकारी: वह सहायक कलेक्टर, जिसे राज्य सरकार जिले के एक या अधिक उपखंडों का प्रभारी बनाती है (धारा 20); उसे सहायक कलेक्टर और तहसीलदार की सभी शक्तियाँ प्राप्त हैं (धारा 27)। संहिता की धारा 14 के अनुसार उपखंड का प्रभारी कार्यपालक मजिस्ट्रेट उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) कहलाता है।
  • तहसीलदार: धारा 20 के अनुसार प्रत्येक तहसील में एक तहसीलदार होता है। वह भू-राजस्व अधिनियम, राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 और अन्य कानूनों से मिली शक्तियों का प्रयोग करता है (धारा 25) और उसे नायब तहसीलदार की सभी शक्तियाँ प्राप्त हैं (धारा 27)।
  • राजस्थान तहसीलदार सेवा: तहसीलदार और नायब तहसीलदार इस संवर्ग के सदस्य हैं, जो राजस्थान तहसीलदार सेवा नियम, 1956 के अधीन है; राजस्व मंडल, अजमेर की एक शाखा उनकी नियुक्ति, वरिष्ठता और स्थानांतरण का कार्य देखती है। तहसीलदार के सभी पद पदोन्नति से भरे जाते हैं, अधिकतर नायब तहसीलदारों में से। नायब तहसीलदार के आधे पद राजस्थान लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षा से सीधी भर्ती द्वारा और आधे निरीक्षकों की पदोन्नति से भरे जाते हैं।
  • नायब तहसीलदार: राज्य सरकार किसी तहसील में आवश्यकतानुसार नायब तहसीलदार नियुक्त कर सकती है; उप-तहसील का प्रभारी तहसीलदार या नायब तहसीलदार होता है (धारा 20)। राज्य सरकार नायब तहसीलदार को तहसीलदार की सभी या कोई भी शक्तियाँ दे सकती है (धारा 26)।

भू-अभिलेख: पटवारी से निदेशक तक

  • पटवारी: प्रत्येक पटवार मंडल के लिए एक; वह मंडल के वार्षिक रजिस्टर और अभिलेख रखता व सुधारता है तथा भू-धारकों और काश्तकारों से लगान, राजस्व और अन्य बकाया वसूल करता है (धारा 31)। पटवार मंडल भू-अभिलेख निदेशक राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति से बनाता है (धारा 30)।
  • गिरदावर कानूनगो (भू-अभिलेख निरीक्षक): प्रत्येक भू-अभिलेख निरीक्षक वृत्त के लिए एक, जो वृत्त के रजिस्टरों और अभिलेखों के रखरखाव व सुधार की देखरेख करता है (धारा 33)। ये वृत्त भू-अभिलेख निदेशक बनाता है (धारा 32)।
  • सदर कानूनगो: प्रत्येक जिले में एक या अधिक, जो गिरदावर कानूनगो और पटवारियों के काम की देखरेख करते हैं (धारा 34)।
  • भू-अभिलेख निदेशक: राज्य सरकार पूरे राज्य के लिए नियुक्त करती है (धारा 19); वह सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेखों को तैयार करने, संशोधित करने और रखने का प्रभारी है (धारा 25)।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • SDO और SDMराजस्व कानून में उपखंड अधिकारी · उपखंड के प्रभारी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के रूप में उपखंड मजिस्ट्रेट।
  • कानूनदंड प्रक्रिया संहिता, 1973 30 जून 2024 तक · भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 1 जुलाई 2024 से · पुरानी धारा 144 वाले अत्यावश्यक आदेश अब धारा 163 में।
  • नियुक्तिपटवारी और गिरदावर कानूनगो, कलेक्टर · सदर कानूनगो, भू-अभिलेख निदेशक · तहसीलदार, राजस्व मंडल का अध्यक्ष, जो राजस्थान तहसीलदार सेवा का नियुक्ति प्राधिकारी है (RPSC, UPSC या SSC नहीं)।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 33

तहसीलदार की नियुक्ति होती है

  1. (1)संघ लोक सेवा आयोग द्वारा
  2. (2)कर्मचारी चयन आयोग द्वारा
  3. (3)राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा
  4. (4)राजस्व मंडल द्वारा
उत्तर देखें

✓ (4) राजस्व मंडल द्वारा

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

संरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 19

किस अधिनियम द्वारा जिला कलेक्टर को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया ?

  1. (1)आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2004
  2. (2)आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005
  3. (3)आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2007
  4. (4)आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2008
उत्तर देखें

✓ (2) आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

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