एक नज़र में
- लोढ़ा समिति: 28 फरवरी 2014 को राज्य ने महाधिवक्ता नरपत मल लोढ़ा की अध्यक्षता में 1973 के अधिनियम में संशोधन कर उसे सशक्त बनाने के लिए समिति बनाई, जिसे एक वर्ष में प्रतिवेदन देना था।
- स्थापना का क्रम: ओडिशा में लोकपाल 1970 में, महाराष्ट्र में लोकायुक्त 1971 में, राजस्थान में 1973 में।
- प्रथम उप-लोकायुक्त: के.पी.यू. मेनन, पूर्व मुख्य सचिव (5 जून 1973 से 25 जून 1974)।
तथ्य
| स्वरूप | उच्च-स्तरीय वैधानिक और स्वतंत्र संस्थान; राज्य सरकार का विभाग नहीं |
|---|---|
| मुख्यालय | जयपुर |
| प्रभावी | 3 फरवरी 1973 से, जब अध्यादेश लागू हुआ; अधिनियम को 26 मार्च 1973 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली |
| नियुक्ति | राज्यपाल, अधिपत्र द्वारा, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष से परामर्श के बाद (धारा 3) |
| कार्यकाल | पाँच वर्ष (धारा 5); आठ वर्ष की बढ़ोतरी 2019 के संशोधन से वापस ली गई |
| समय-सीमा | शिकायत की गई कार्रवाई के पाँच वर्ष बाद की गई शिकायत की जाँच नहीं (धारा 8(3)) |
किस पर जाँच करता है (धारा 7)
- लोक सेवक द्वारा किसी को अनुचित हानि या कष्ट पहुँचाने के अभिकथन।
- अपने या किसी अन्य के लिए अवैध लाभ पाने हेतु पदीय स्थिति का दुरुपयोग।
- कृत्यों के निर्वहन में व्यक्तिगत हित या भ्रष्ट अथवा अनुचित हेतुओं से प्रेरित होना।
- लोक सेवक की हैसियत में भ्रष्टाचार या सच्चरित्रता की कमी।
किनकी जाँच कर सकता है
- मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मंत्रिपरिषद के सदस्य (मंत्री, राज्य मंत्री, उप-मंत्री)।
- राज्य के कार्यकलापों से संबंधित लोक सेवा या लोक पद पर नियुक्त व्यक्ति।
- जिला परिषद के प्रमुख व उप-प्रमुख, पंचायत समिति के प्रधान व उप-प्रधान, उनकी स्थायी समितियों के अध्यक्ष; महापौर व उप-महापौर, नगरपालिका निकायों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष।
- अधिसूचित स्थानीय प्राधिकरणों, राज्य के निगमों, उन सरकारी कंपनियों (जिनमें राज्य की कम से कम 51 प्रतिशत अंशपूँजी हो) और राज्य के नियंत्रण वाली अधिसूचित पंजीकृत सोसाइटियों के कर्मचारी।
क्षेत्राधिकार से बाहर
- मुख्यमंत्री; उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व न्यायाधीश और न्यायिक सेवा के सदस्य; किसी न्यायालय के अधिकारी व कर्मचारी।
- महालेखाकार, राजस्थान; आरपीएससी के अध्यक्ष व सदस्य; मुख्य निर्वाचन आयुक्त, निर्वाचन आयुक्त, प्रादेशिक आयुक्त और मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राजस्थान; विधानसभा सचिवालय के अधिकारी व कर्मचारी।
- सरपंच, पंच और विधायक: शिकायत हो सकती है पर प्रसंज्ञान नहीं लिया जा सकता क्योंकि वे अधिकार क्षेत्र में नहीं।
- सेवानिवृत्त लोक सेवक।
लोकायुक्त
| लोकायुक्त | कार्यकाल |
|---|---|
| न्यायमूर्ति आई.डी. दुआ (प्रथम), उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश | 28 अगस्त 1973 से 27 अगस्त 1978 |
| न्यायमूर्ति डी.पी. गुप्ता | 28 अगस्त 1978 से 5 अगस्त 1979 |
| न्यायमूर्ति एम.एल. जोशी | 6 अगस्त 1979 से 7 अगस्त 1982 |
| न्यायमूर्ति के.एस. सिद्धू | 4 अप्रैल 1984 से 3 जनवरी 1985 |
| न्यायमूर्ति एम.एल. श्रीमाल | 4 जनवरी 1985 से 3 जनवरी 1990 |
| न्यायमूर्ति पी.डी. कुदाल | 16 जनवरी 1990 से 6 मार्च 1990 |
| न्यायमूर्ति एम.बी. शर्मा | 10 अगस्त 1990 से 30 सितम्बर 1993 |
| न्यायमूर्ति वी.एस. दवे | 21 जनवरी 1994 से 16 फरवरी 1994 |
| न्यायमूर्ति एम.बी. शर्मा | 6 जुलाई 1994 से 6 जुलाई 1999 |
| न्यायमूर्ति मिलाप चन्द जैन | 26 नवम्बर 1999 से 26 नवम्बर 2004 |
| न्यायमूर्ति जी.एल. गुप्ता | 1 मई 2007 से 30 अप्रैल 2012 |
| न्यायमूर्ति एस.एस. कोठारी | 25 मार्च 2013 से 7 मार्च 2019 |
| न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा | 9 मार्च 2021 से 8 मार्च 2026 |
न्यायमूर्ति लोहरा का पाँच वर्ष का कार्यकाल 8 मार्च 2026 को पूरा हुआ; जून 2026 में भी पद रिक्त था।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- धारा 7 का आधार नहींमहिलाओं का यौन उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव या बच्चों के विरुद्ध हिंसा।
- दो कानूनकेन्द्र का लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 (16 जनवरी 2014 से प्रभावी) · राजस्थान का अपना लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 19
राजस्थान के प्रथम लोकायुक्त कौन थे?
- (1)जस्टिस प्रताप कृष्ण लोहरा
- (2)जस्टिस एस.एस. कोठारी
- (3)जस्टिस आई.डी. दुआ
- (4)जस्टिस जे.एल. गुप्ता
उत्तर देखें
✓ (3) जस्टिस आई.डी. दुआ
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 34
2014 में नरपत मल लोढ़ा की अध्यक्षता में गठित समिति निम्न में से किस विषय से सम्बन्धित है ?
- (1)पंचायती राज
- (2)मानवाधिकार
- (3)राज्यपाल
- (4)लोकायुक्त
उत्तर देखें
✓ (4) लोकायुक्त
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 34
राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 की धारा 7 के तहत, लोकायुक्त को कुछ मामलों में मंत्रियों और लोक सेवकों के खिलाफ आरोपों की जाँच करने का अधिकार है। निम्नलिखित में से कौन सा विषय उन जाँचों का हिस्सा नहीं है ?
- (1)लोक सेवकों द्वारा पहुँचाई गई अकारण हानि या पीड़ा।
- (2)अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए अवैध लाभ प्राप्त करने के लिए एक लोक सेवक के रूप में अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग करना।
- (3)महिलाओं का यौन उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव और बच्चों के खिलाफ हिंसा।
- (4)लोक सेवक की हैसियत से भ्रष्टाचार का दोषी होने या पारदर्शिता की कमी से संबंधित हो सकता है।
उत्तर देखें
✓ (3) महिलाओं का यौन उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव और बच्चों के खिलाफ हिंसा।
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