एक नज़र में
- पद से हटाना: राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है (अनुच्छेद 156), इसलिए उसे केवल राष्ट्रपति हटा सकता है; मुख्यमंत्री नहीं।
- RPSC: अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करता है (अनुच्छेद 316); उन्हें केवल राष्ट्रपति हटा सकता है (अनुच्छेद 317): कदाचार पर उच्चतम न्यायालय की जाँच के बाद, या दिवालिया होने, पद के बाहर वेतन वाला काम करने अथवा मानसिक या शारीरिक अक्षमता पर आदेश द्वारा।
- राजप्रमुख से राज्यपाल: राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम ने 1 नवम्बर 1956 से राजप्रमुख का पद समाप्त किया। गुरुमुख निहाल सिंह 25 अक्टूबर 1956 को प्रथम राज्यपाल नियुक्त हुए और 1 नवम्बर 1956 को पद ग्रहण किया।
- कार्यपालिका की सारी कार्रवाई राज्यपाल के नाम से होती है (अनुच्छेद 166), पर वह मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सहायता और मंत्रणा से कार्य करता है, सिवाय उन बातों के जिनमें उसे अपने विवेक से कार्य करना है (अनुच्छेद 163)।
पद: अनुच्छेद 153 से 160
| अनुच्छेद | क्या कहता है |
|---|---|
| 153 | प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल; सातवें संशोधन (1956) से जोड़े गए परन्तुक के अनुसार एक ही व्यक्ति दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल हो सकता है |
| 155 | राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा नियुक्त करता है |
| 156 | पद ग्रहण की तिथि से पाँच वर्ष का कार्यकाल; राष्ट्रपति को लिखित त्यागपत्र दे सकता है, और उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक पद पर बना रहता है |
| 157 | योग्यता: भारत का नागरिक जो 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो |
| 158 | संसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं होगा (सदस्य नियुक्त हो तो पद ग्रहण के दिन उसका स्थान रिक्त हो जाता है); कोई अन्य लाभ का पद नहीं; बिना किराए सरकारी निवास; कार्यकाल में उपलब्धियाँ घटाई नहीं जा सकतीं |
| 160 | अध्याय में जिस आकस्मिकता का उपबंध नहीं, उसमें राज्यपाल के कृत्यों के निर्वहन का उपबंध राष्ट्रपति कर सकता है |
कार्यपालिका शक्तियाँ
| अनुच्छेद | उपबंध |
|---|---|
| 154 | राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित है, जिसका प्रयोग वह स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा करता है |
| 161 | राज्य की कार्यपालिका शक्ति के विषयों से जुड़े कानूनों के विरुद्ध अपराधों में क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार देना तथा दंडादेश का निलंबन, परिहार या लघुकरण |
| 163(2), (3) | कोई विषय उसके विवेक का है या नहीं, इस पर उसका निर्णय अंतिम है; मंत्रियों ने उसे क्या सलाह दी, इसकी जाँच किसी न्यायालय में नहीं हो सकती |
| 164(1) | मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है, और अन्य मंत्रियों की मुख्यमंत्री की सलाह पर; मंत्री उसके प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं |
| 165 | महाधिवक्ता की नियुक्ति करता है, जो उसके प्रसादपर्यंत पद धारण करता है |
| 166(3) | राज्य सरकार के कार्य-संचालन के नियम बनाता है और मंत्रियों में कार्य का बँटवारा करता है |
| 167 | मुख्यमंत्री मंत्रिपरिषद के सभी निर्णय और विधान के प्रस्ताव उसे बताएगा तथा उसके द्वारा माँगी गई जानकारी देगा |
अनुच्छेद 163 से 167 के अधीन मंत्रिपरिषद (उसका आकार, विधानसभा के प्रति उत्तरदायित्व और छह मास का नियम) मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद वाले पृष्ठ पर है।
विधायी और वित्तीय शक्तियाँ
| अनुच्छेद | उपबंध |
|---|---|
| 174 | सदन को आहूत करता है, उसका सत्रावसान करता है और विधानसभा का विघटन करता है |
| 175, 176 | सदन को संबोधित कर सकता है और संदेश भेज सकता है; प्रत्येक आम चुनाव के बाद पहले सत्र और प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र के आरंभ में विधानसभा में अभिभाषण देता है |
| 192 | कोई सदस्य अनुच्छेद 191(1) के किसी आधार पर निरर्ह हुआ या नहीं, इसका निर्णय निर्वाचन आयोग की राय लेकर उसी के अनुसार करता है (दल-बदल पर निर्णय अध्यक्ष करता है) |
| 200 | पारित विधेयक राज्यपाल के पास जाता है, जो अनुमति देता है, अनुमति रोकता है या उसे राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करता है। धन विधेयक के अतिरिक्त विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है; दोबारा पारित होने पर अनुमति नहीं रोक सकता। जो विधेयक उच्च न्यायालय की स्थिति को खतरे में डाले, उसे आरक्षित करना अनिवार्य है |
| 201 | आरक्षित विधेयक पर राष्ट्रपति अनुमति देता है या अनुमति रोकता है |
| 202 | प्रत्येक वर्ष वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) सदन के समक्ष रखवाता है |
| 213 | अध्यादेश: विधानसभा सत्र में न हो और राज्यपाल को तुरंत कार्रवाई आवश्यक लगे तो वह अध्यादेश प्रख्यापित कर सकता है, जिसका बल विधानमंडल के अधिनियम के समान है। उसे विधानसभा के समक्ष रखना होता है, विधानसभा के अस्वीकार करने पर वह पहले समाप्त हो जाता है, और राज्यपाल उसे कभी भी वापस ले सकता है |
उन्मुक्ति और राष्ट्रपति शासन
- अनुच्छेद 361: राज्यपाल अपने पद की शक्तियों और कर्तव्यों के लिए किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं; पद की अवधि में उसके विरुद्ध कोई आपराधिक कार्यवाही प्रारंभ या जारी नहीं की जा सकती और कोई न्यायालय उसकी गिरफ्तारी या कारावास की आदेशिका जारी नहीं कर सकता।
- अनुच्छेद 356: राज्य का शासन संविधान के अनुसार न चल पाने पर राष्ट्रपति राज्यपाल के प्रतिवेदन पर, या अन्यथा, राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा कर सकता है।
| राष्ट्रपति शासन | उद्घोषणा के समय राज्यपाल | वापसी के समय राज्यपाल |
|---|---|---|
| 1967 | सम्पूर्णानंद | हुकुम सिंह |
| 1977 | न्यायमूर्ति वेदपाल त्यागी (कार्यवाहक) | रघुकुल तिलक |
| 1980 | रघुकुल तिलक | रघुकुल तिलक |
| 1992-93 | एम. चेन्ना रेड्डी | बलिराम भगत |
चारों अवधियों की तिथियाँ और प्रत्येक से पहले व बाद के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद वाले पृष्ठ पर हैं।
राजप्रमुख और राजस्थान के राज्यपाल
| कौन | तथ्य |
|---|---|
| राजप्रमुख | जयपुर के सवाई मानसिंह, 30 मार्च 1949 से 31 अक्टूबर 1956 |
| प्रथम राज्यपाल | गुरुमुख निहाल सिंह, 1 नवम्बर 1956 से 15 अप्रैल 1962 |
| प्रथम महिला राज्यपाल | प्रतिभा पाटिल, 8 नवम्बर 2004 से जून 2007, राज्यपालों की सरकारी सूची में पहली महिला; बाद में भारत की राष्ट्रपति बनीं |
| अन्य महिला राज्यपाल | प्रभा राव (दिसम्बर 2009 से अप्रैल 2010) और मार्गरेट अल्वा (मई 2012 से अगस्त 2014) |
| 23 अक्टूबर 2026 को राज्यपाल | हरिभाऊ किसनराव बागडे, 31 जुलाई 2024 से पद पर |
कमला बेनीवाल राजस्थान के राज्यपालों की सरकारी सूची में नहीं हैं। जयपुर में राज्यपाल के निवास और कार्यालय राज भवन का नाम दिसम्बर 2025 में बदलकर लोक भवन कर दिया गया। 1956 से पहले के संघ और राजप्रमुख राजस्थान के एकीकरण वाले पृष्ठ पर हैं।
विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति और राज्यपाल राहत कोष
| विश्वविद्यालय | प्रमुख |
|---|---|
| राजस्थान के अधिनियमों से स्थापित राज्य विश्वविद्यालय | राज्यपाल पद के आधार पर कुलाधिपति होता है: विश्वविद्यालय का प्रमुख, जो दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करता है |
| निजी विश्वविद्यालय | कुलाधिपति की नियुक्ति विश्वविद्यालय का प्रायोजक निकाय करता है, उसके अपने अधिनियम में लिखी स्वीकृति या सहमति से |
| राज्यपाल राहत कोष | तथ्य |
|---|---|
| गठन | 14 मार्च 1973 (1975 नहीं), गवर्नर रिलीफ फण्ड विनियम 1973 के अंतर्गत |
| उद्देश्य | अकाल व अभावग्रस्त क्षेत्रों में सहायता; अग्निकांड, बाढ़ व दुर्घटना; महामारी, अतिवृष्टि, टिड्डी, ओलावृष्टि (फसल नुकसान, औषधि व उपकरण); तात्कालिक आवश्यकता का अन्य कारण जो राज्यपाल उचित समझें |
| आय | किसी व्यक्ति, संस्था या निकाय से आर्थिक सहायता; कोष की पूँजी के विनियोजन पर ब्याज; अन्य वैधानिक योगदान |
| व्यय | राज्यपाल की आज्ञा और निर्देशानुसार, निर्धारित प्रक्रिया से |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- शपथराज्यपाल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति, या उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश, के समक्ष शपथ लेता है (अनु. 159) · मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ वह दिलाता है (अनु. 164(3))।
- छह सप्ताह · छह मासविधानसभा के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह बाद अध्यादेश समाप्त हो जाता है (अनु. 213) · एक सत्र की अंतिम बैठक और अगले सत्र की पहली बैठक के बीच छह मास से अधिक का अंतर नहीं हो सकता (अनु. 174)।
- कुलाधिपति · कुलाध्यक्षराज्य विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति राज्यपाल · केन्द्रीय विश्वविद्यालयों का कुलाध्यक्ष (विजिटर) भारत का राष्ट्रपति (केन्द्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009)।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (सीनियर सैकण्डरी स्तर) 2024 · प्रश्न 42
राज्य के राज्यपाल को कौन हटा सकता है? (निम्नलिखित में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें:)
- (1)भारत के मुख्य न्यायाधीश
- (2)मुख्यमंत्री
- (3)राष्ट्रपति
- (4)प्रधानमंत्री
उत्तर देखें
✓ (3) राष्ट्रपति
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 17
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 200 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : I. विधानसभा से पारित विधेयक राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। II. राज्यपाल घोषित करेगा कि वह विधेयक पर अनुमति देता है या अनुमति रोक लेता है। III. राज्यपाल विधेयक पर अनुमति देता है या अनुमति रोक लेता है अथवा राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखता है। कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए : कूट :
- (1)केवल I सही है।
- (2)केवल I तथा II सही हैं।
- (3)केवल II सही है।
- (4)I, II तथा III सभी सही हैं।
उत्तर देखें
✓ (4) I, II तथा III सभी सही हैं।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 24
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : I. अनुच्छेद 163 के अनुसार राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रि-परिषद होगी। II. अनुच्छेद 164(1) के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा। III. अनुच्छेद 164(1) के अनुसार, मंत्री, राज्यपाल के प्रसादपर्यंत अपने पद धारण करेंगे। कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए : कूट :
- (1)केवल I सही है।
- (2)केवल II सही है।
- (3)केवल I तथा III सही हैं।
- (4)I, II तथा III सभी सही हैं।
उत्तर देखें
✓ (4) I, II तथा III सभी सही हैं।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 32
राजस्थान लोक सेवा आयोग के संबंध में निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए : (i) आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य राजस्थान के राज्यपाल द्वारा नियुक्त होते हैं । (ii) आयोग के अध्यक्ष या कोई अन्य सदस्य केवल राष्ट्रपति की आज्ञा से अपने पद से हटाए जा सकते हैं ।
- (1)न तो (i) न ही (ii) सही है ।
- (2)(i) व (ii) दोनों सही हैं ।
- (3)केवल (ii) सही है ।
- (4)केवल (i) सही है ।
उत्तर देखें
✓ (2) (i) व (ii) दोनों सही हैं ।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (सीनियर सैकण्डरी स्तर) 2024 · प्रश्न 48
राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति निम्नलिखित में से किस के द्वारा की जाती है?
- (1)मुख्यमंत्री
- (2)राज्यपाल
- (3)उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
- (4)अध्यक्ष यू पी एस सी
उत्तर देखें
✓ (2) राज्यपाल
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 28
राजस्थान के राज्यपाल के संबंध में निम्नांकित में से कौन सा कथन सही नहीं है ?
- (1)राज्य पुनर्गठन आयोग की अनुशंसा के आधार पर राजप्रमुख के पद को समाप्त कर दिया गया।
- (2)7वें संविधान संशोधन से राजप्रमुख का पद समाप्त किया गया।
- (3)गुरुमुख निहाल सिंह को 1 नवम्बर, 1956 को राजस्थान का पहला राज्यपाल नियुक्त किया गया।
- (4)हरिभाऊ किसनराव बागडे ने 31 जुलाई, 2024 को राजस्थान के राज्यपाल का पदभार संभाला।
उत्तर देखें
✓ (3) गुरुमुख निहाल सिंह को 1 नवम्बर, 1956 को राजस्थान का पहला राज्यपाल नियुक्त किया गया।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 21
निम्नलिखित में से राजस्थान राज्य की प्रथम महिला राज्यपाल (गवर्नर) कौन थीं?
- (1)कमला बेनीवाल
- (2)प्रतिभा पाटिल
- (3)प्रभा राव
- (4)मार्गरेट अल्वा
उत्तर देखें
✓ (2) प्रतिभा पाटिल
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंबीएसटीसी 2026 (प्रथम पारी) · प्रश्न 91
राजस्थान के राज्यपाल को पहचानिए, जिनकी पदावधि के दौरान अनुच्छेद 356 के अधीन राष्ट्रपति शासन केवल उद्घोषित किया गया, वापस नहीं लिया गया –
- (1)रघुकुल तिलक
- (2)हुकुम सिंह
- (3)एम. चेन्ना रेड्डी
- (4)बलिराम भगत
उत्तर देखें
✓ (3) एम. चेन्ना रेड्डी
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 69
राजस्थान के राज्यपाल पदेन कुलाधिपति होते हैं –
- (1)समस्त राज्य विश्वविद्यालयों के साथ ही राजस्थान के भू–भाग में कार्यरत केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के।
- (2)राजस्थान के समस्त राज्य के साथ ही निजी विश्वविद्यालयों के।
- (3)राजस्थान के समस्त राज्य विश्वविद्यालयों के।
- (4)समस्त राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों के साथ ही राजस्थान के भू–भाग में कार्यरत केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के।
उत्तर देखें
✓ (3) राजस्थान के समस्त राज्य विश्वविद्यालयों के।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2024 · प्रश्न 55
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए – (I) राजस्थान में गवर्नर रिलीफ फण्ड 1975 में निर्मित किया गया। (II) गवर्नर रिलीफ फण्ड से महामहिम राज्यपाल की आज्ञा एवं निर्देशानुसार निर्धारित प्रक्रिया से व्यय किया जाता है। सही विकल्प चुनिये –
- (1)केवल (II) सही है।
- (2)(I) और (II) दोनों सही हैं।
- (3)केवल (I) सही है।
- (4)न तो (I) ना ही (II) सही है।
उत्तर देखें
✓ (1) केवल (II) सही है।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 29
निम्न में से किसकी सिफारिश पर राजस्थान में राजप्रमुख के पद को समाप्त कर राज्यपाल की व्यवस्था की गई ?
- (1)राज्य विधान सभा
- (2)संविधान सभा
- (3)राज्य पुनर्गठन आयोग
- (4)राज्य प्रशासनिक सुधार आयोग
उत्तर देखें
✓ (3) राज्य पुनर्गठन आयोग
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