एक नज़र में
- एकसदनीय: राजस्थान का विधानमंडल राज्यपाल और एक सदन, विधान सभा, से बनता है (अनुच्छेद 168); राजस्थान में विधान परिषद नहीं है।
- प्रथम: नरोत्तम लाल जोशी पहले अध्यक्ष और लाल सिंह शक्तावत पहले उपाध्यक्ष थे, दोनों 31 मार्च 1952 से; महाराव संग्राम सिंह पहले प्रोटेम अध्यक्ष थे।
- 16वीं विधान सभा में आरक्षित सीटें: 200 में से 34 अनुसूचित जाति और 25 अनुसूचित जनजाति के लिए।
- विधान सभा के प्रक्रिया नियमों का नियम 3A: एक कैलेंडर वर्ष में कम से कम तीन सत्र (शीतकालीन, बजट और वर्षाकालीन) और कुल मिलाकर कम से कम साठ बैठकें।
संविधान की रूपरेखा: अनुच्छेद 168 से 212
| अनुच्छेद | क्या कहता है |
|---|---|
| 168 | प्रत्येक राज्य का विधानमंडल राज्यपाल और एक या दो सदनों से बनता है; दो सदनों वाले राज्यों के नाम अनुच्छेद 168(1)(क) में हैं, शेष सभी राज्यों में एक सदन, विधान सभा, है |
| 169 | विधान सभा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित एवं मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से संकल्प पारित करे, तो संसद विधि द्वारा विधान परिषद का सृजन या उत्सादन कर सकती है |
| 170 | विधान सभा में अधिकतम 500 और न्यूनतम 60 सदस्य, प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा। 2026 के बाद की पहली जनगणना के आँकड़े प्रकाशित होने तक सीटों की संख्या 1971 की जनगणना पर और निर्वाचन क्षेत्र 2001 की जनगणना पर आधारित रहेंगे |
| 171 | विधान परिषद के सदस्य विधान सभा के सदस्यों के एक-तिहाई से अधिक नहीं ("एक-तिहाई" ने "एक-चौथाई" का स्थान संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 से लिया) और किसी भी दशा में चालीस से कम नहीं |
| 172 | विधान सभा, यदि पहले भंग न हो, अपने प्रथम अधिवेशन के लिए नियत तिथि से पाँच वर्ष चलती है; आपात की उद्घोषणा के दौरान संसद विधि द्वारा इसे एक बार में अधिकतम एक वर्ष बढ़ा सकती है, पर उद्घोषणा समाप्त होने के छह माह से आगे नहीं |
| 173 | सदस्य भारत का नागरिक हो, कम से कम 25 वर्ष का हो और निर्वाचन आयोग द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति के सामने शपथ ले |
| 178, 179 | विधान सभा अपने सदस्यों में से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनती है। सदस्य न रहने पर पद रिक्त हो जाता है; लिखित त्यागपत्र दिया जा सकता है (अध्यक्ष उपाध्यक्ष को, उपाध्यक्ष अध्यक्ष को); कम से कम 14 दिन की सूचना के बाद लाए गए और सभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा हटाया जा सकता है। विघटन पर अध्यक्ष नई विधान सभा के पहले अधिवेशन से ठीक पहले तक पद पर रहता है |
| 180 | अध्यक्ष का पद रिक्त हो तो उसके कर्तव्य उपाध्यक्ष निभाता है; दोनों पद रिक्त हों तो राज्यपाल द्वारा नियुक्त सदस्य |
| 181 | अपने को हटाने का संकल्प विचाराधीन हो तो अध्यक्ष पीठासीन नहीं होता; वह बोल सकता है और केवल प्रथमतः मत दे सकता है, मत बराबर होने पर नहीं |
| 188 | प्रत्येक सदस्य स्थान ग्रहण करने से पहले राज्यपाल या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति के सामने शपथ या प्रतिज्ञान करता है |
| 191, 192 | निरर्हताएँ: लाभ का पद, न्यायालय द्वारा घोषित विकृतचित्तता, अनुन्मोचित दिवालियापन, नागरिक न होना, संसद की विधि, और दल-बदल (दसवीं अनुसूची)। अनुच्छेद 191(1) के प्रश्न का निर्णय राज्यपाल निर्वाचन आयोग की राय लेकर और उसके अनुसार करता है |
| 194 | विधानमंडल में वाक्-स्वातंत्र्य; विधानमंडल या उसकी समिति में कही गई बात या दिए गए मत के लिए किसी सदस्य पर किसी न्यायालय में कार्यवाही नहीं |
| 196, 199 | सदन का सत्रावसान होने पर लंबित विधेयक व्यपगत नहीं होता (अनुच्छेद 196(3)); धन विधेयक की परिभाषा अनुच्छेद 199 में है |
| 203, 204 | राज्य की संचित निधि पर भारित व्यय पर चर्चा हो सकती है, मतदान नहीं; शेष व्यय अनुदान की माँगों के रूप में विधान सभा के सामने आता है, जिन्हें वह स्वीकार, अस्वीकार या कम कर सकती है; इसके बाद विनियोग विधेयक आता है |
| 208, 210 | सदन अपनी प्रक्रिया के नियम स्वयं बनाता है; कार्य राज्य की राजभाषा, हिंदी या अंग्रेज़ी में होता है, और जो सदस्य इनमें से किसी भाषा में अपनी बात पर्याप्त रूप से व्यक्त न कर सके, उसे अध्यक्ष मातृभाषा में बोलने की अनुमति दे सकता है |
| 212 | प्रक्रिया की किसी अनियमितता के आधार पर कार्यवाही की विधिमान्यता पर किसी न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जा सकता |
| 332, 334 | अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित; यह आरक्षण संविधान के प्रारंभ से अस्सी वर्ष पर समाप्त होगा (संविधान (एक सौ चारवाँ संशोधन) अधिनियम, 2019) |
| 332A, 334A | महिलाओं के लिए सीटें (एक-तिहाई, संविधान (एक सौ छहवाँ संशोधन) अधिनियम, 2023) उस संशोधन के लागू होने के बाद की पहली जनगणना पर आधारित परिसीमन के बाद ही प्रभावी होंगी |
राज्यपाल की भूमिका (आहूत करना, सत्रावसान और विघटन, अनुच्छेद 174 से 176; विधेयकों पर अनुमति और बजट, अनुच्छेद 200 से 202; अध्यादेश, अनुच्छेद 213) राज्यपाल वाले पृष्ठ पर है।
राजस्थान विधान सभा: तथ्य
| सदस्य संख्या | पहली विधान सभा (1952) में 160, दूसरी और तीसरी में 176, चौथी और पाँचवीं में 184, छठी (1977) से 200। संख्या परिसीमन आयोग तय करता है |
|---|---|
| पहली विधान सभा | गठन 23 फरवरी 1952; सदस्यों ने 29 मार्च 1952 को शपथ ली |
| अजमेर के सदस्य | अजमेर राज्य की अपनी 30 सदस्यों की विधान सभा मई 1952 से थी; नवंबर 1956 में अजमेर के राजस्थान में विलय पर उसके सदस्य राजस्थान की पहली विधान सभा के शेष कार्यकाल के लिए उसके सदस्य माने गए |
| 16वीं विधान सभा | गठन 4 दिसंबर 2023, जिस दिन निर्वाचन आयोग ने निर्वाचित सदस्यों की अधिसूचना जारी की |
| प्रक्रिया नियम | "राजस्थान विधान सभा प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियम", पहली बार 1956 में बने |
अध्यक्ष
सदन अध्यक्ष का निर्वाचन राज्यपाल द्वारा तय तिथि पर करता है; कोई भी सदस्य किसी अन्य सदस्य के नाम का प्रस्ताव लिखित सूचना से देता है, जिसका समर्थन तीसरा सदस्य करता है (नियम 7)। उपाध्यक्ष का निर्वाचन अध्यक्ष द्वारा तय तिथि पर होता है (नियम 8)।
| अध्यक्ष | कार्यकाल |
|---|---|
| नरोत्तम लाल जोशी | 31 मार्च 1952 – 25 अप्रैल 1957 |
| रामनिवास मिर्धा | 25 अप्रैल 1957 – 13 मार्च 1962; 14 मार्च 1962 – 3 मई 1967 |
| निरंजन नाथ आचार्य | 3 मई 1967 – 20 मार्च 1972 |
| रामकिशोर व्यास | 20 मार्च 1972 – 18 जुलाई 1977 |
| लक्ष्मण सिंह महारावल | 18 जुलाई 1977 – 20 जून 1979 |
| गोपाल सिंह | 25 सितंबर 1979 – 7 जुलाई 1980 |
| पूनम चंद विश्नोई | 7 जुलाई 1980 – 20 मार्च 1985 |
| हीरालाल देवपुरा | 20 मार्च 1985 – 16 अक्टूबर 1985 |
| गिरिराज प्रसाद तिवाड़ी | 31 जनवरी 1986 – 11 मार्च 1990 |
| हरिशंकर भाभड़ा | 16 मार्च 1990 – 21 दिसंबर 1993; 30 दिसंबर 1993 – 5 अक्टूबर 1994 |
| शांतिलाल चपलोत | 7 अप्रैल 1995 – 18 मार्च 1998 |
| समरथ लाल मीणा | 24 जुलाई 1998 – 4 जनवरी 1999 |
| परसराम मदेरणा | 6 जनवरी 1999 – 15 जनवरी 2004 |
| सुमित्रा सिंह | 16 जनवरी 2004 – 1 जनवरी 2009 |
| दीपेन्द्र सिंह शेखावत | 2 जनवरी 2009 – 20 जनवरी 2014 |
| कैलाश चंद्र मेघवाल | 22 जनवरी 2014 – 15 जनवरी 2019 |
| सी.पी. जोशी | 16 जनवरी 2019 – 20 दिसंबर 2023 |
| वासुदेव देवनानी | 21 दिसंबर 2023 से (अध्यक्ष, 23 अक्टूबर 2026 तक) |
प्रोटेम अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष, विधान सभावार
नई विधान सभा जब तक अपना अध्यक्ष नहीं चुनती, तब तक राज्यपाल द्वारा नियुक्त सदस्य अध्यक्ष के कर्तव्य निभाता है (अनुच्छेद 180(1)): यही प्रोटेम अध्यक्ष है। मुख्यमंत्रियों की सूची मुख्यमंत्री वाले पृष्ठ पर है।
| विधान सभा | प्रोटेम अध्यक्ष (नियुक्ति वर्ष) | नेता प्रतिपक्ष |
|---|---|---|
| पहली | महाराव संग्राम सिंह (1952); जयनारायण व्यास (1956) | जसवंत सिंह; तन सिंह |
| दूसरी | नारायण सिंह मसूदा (1957) | नरेन्द्र सिंह (दूदू) |
| तीसरी | नारायण सिंह मसूदा (1962) | लक्ष्मण सिंह |
| चौथी | पूनम चंद विश्नोई (1967) | लक्ष्मण सिंह |
| पाँचवीं | यशवंत सिंह नाहर (1972) | लक्ष्मण सिंह |
| छठी | मेजर फतेह सिंह (1977) | परसराम मदेरणा; रामनारायण चौधरी; लक्ष्मण सिंह |
| सातवीं | परसराम मदेरणा (1980) | भैरोंसिंह शेखावत |
| आठवीं | लक्ष्मण सिंह (1985) | भैरोंसिंह शेखावत; केदारनाथ शर्मा |
| नौवीं | पूनम चंद विश्नोई (1990) | हरिदेव जोशी |
| दसवीं | पूनम चंद विश्नोई (1993, फिर 1995 और 1998) | परसराम मदेरणा |
| ग्यारहवीं | भैरोंसिंह शेखावत (1998) | भैरोंसिंह शेखावत; गुलाबचंद कटारिया |
| बारहवीं | गंगाराम चौधरी (2004) | बी.डी. कल्ला; रामनारायण चौधरी; हेमाराम चौधरी |
| तेरहवीं | देवी सिंह भाटी (2008) | वसुंधरा राजे; गुलाबचंद कटारिया |
| चौदहवीं | प्रद्युम्न सिंह (2014) | रामेश्वर लाल डूडी |
| पंद्रहवीं | गुलाबचंद कटारिया (2019) | गुलाबचंद कटारिया; राजेन्द्र राठौड़ |
| सोलहवीं | कालीचरण सराफ (2023) | टीकाराम जूली (23 अक्टूबर 2026 तक) |
समितियाँ
समितियाँ स्थायी या तदर्थ होती हैं। विधान सभा की 22 स्थायी समितियाँ हैं: चार वित्तीय और 18 अन्य।
| वर्ग | समितियाँ |
|---|---|
| वित्तीय (4) | जन लेखा समिति; राजकीय उपक्रम समिति; दो प्राक्कलन समितियाँ ('क' और 'ख') |
| अन्य स्थायी (18) | कार्य सलाहकार; सरकारी आश्वासन; पर्यावरण; सदाचार; स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज संस्थाएँ; याचिका; विशेषाधिकार; अधीनस्थ विधान; पिछड़े वर्गों का कल्याण; अल्पसंख्यकों का कल्याण; अनुसूचित जातियों का कल्याण; अनुसूचित जनजातियों का कल्याण; महिलाओं एवं बालकों का कल्याण; सामान्य प्रयोजन; गृह; पुस्तकालय; प्रश्न एवं संदर्भ; नियम |
- सदस्य: वित्तीय समितियाँ आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत पद्धति से निर्वाचित होती हैं; अन्य समितियों के सदस्य अध्यक्ष मनोनीत करता है, सत्ता पक्ष और विपक्ष से, सामान्यतः सदन में उनकी संख्या के अनुपात में। प्रत्येक समिति का सभापति अध्यक्ष उसके सदस्यों में से नामित करता है; कार्य सलाहकार, नियम और सामान्य प्रयोजन समितियों का सभापति अध्यक्ष स्वयं होता है (नियम 212, 247, 253G)।
- कार्यकाल और मंत्री: सदस्यों का कार्यकाल सामान्यतः एक वर्ष; कोई मंत्री सदस्य नहीं हो सकता, सिवाय सरकारी विधेयक की प्रवर समिति के, और कार्य सलाहकार समिति में सदन के नेता के रूप में मुख्यमंत्री के।
- कार्य सलाहकार समिति: सदन अपना कार्य इसी समिति की सिफ़ारिश पर तय करता है।
- पुस्तकालय समिति (नियम 253A): सभापति सहित दस से अधिक सदस्य नहीं, अध्यक्ष द्वारा मनोनीत; कार्यकाल एक वर्ष से अधिक नहीं।
- अधीनस्थ विधान (नियम 238 से 243): नियम 238 में इसका कृत्य है, यह जाँचना कि संविधान द्वारा प्रदत्त या विधानमंडल द्वारा प्रत्यायोजित विनियम, नियम, उप-नियम और उप-विधि बनाने की शक्तियों का उचित प्रयोग हो रहा है या नहीं; नियम 239: पंद्रह से अधिक सदस्य नहीं, अध्यक्ष द्वारा मनोनीत, एक वर्ष से अधिक के लिए नहीं; नियम 240: ऐसे प्रत्येक "आदेश" का केंद्रीय रूप से संख्यांकन और राजपत्र में प्रकाशन; नियम 241: समिति जाँच के लिए आदेश चुनती है।
राष्ट्रपति और राज्यसभा के चुनाव में विधायक
- राष्ट्रपति: राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य निर्वाचक मंडल में होते हैं (अनुच्छेद 54)। प्रत्येक विधायक के मत: राज्य की जनसंख्या को निर्वाचित सदस्यों की संख्या से भाग देने पर आए भागफल में जितने हज़ार हों, उतने मत, और शेषफल 500 या अधिक हो तो एक और; 2026 के बाद की पहली जनगणना के आँकड़े प्रकाशित होने तक जनसंख्या 1971 की जनगणना की ली जाती है (अनुच्छेद 55(2))। चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत पद्धति से, गुप्त मतदान द्वारा होता है (अनुच्छेद 55(3))।
- राजस्थान, 2022: 2,57,65,806 (1971 की जनगणना) ÷ 200 = 1,28,829, यानी 128 हज़ार और शेष 829, इसलिए प्रत्येक विधायक के मत का मूल्य 129 और 200 विधायकों का कुल 25,800।
- राज्यसभा: राज्य के राज्यसभा प्रतिनिधियों को विधान सभा के निर्वाचित सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत पद्धति से चुनते हैं (अनुच्छेद 80(4))।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- गुलाबचंद कटारिया15वीं विधान सभा के प्रोटेम अध्यक्ष (2019) और 11वीं, 13वीं व 15वीं में नेता प्रतिपक्ष, पर अध्यक्ष कभी नहीं।
- अशोक गहलोत11वीं, 13वीं और 15वीं विधान सभा में मुख्यमंत्री, पर विधान सभा की नेता प्रतिपक्ष सूची में नहीं।
- नारायण सिंह मसूदादूसरी और तीसरी विधान सभा के प्रोटेम अध्यक्ष और 1962 से 1967 उपाध्यक्ष, अध्यक्ष कभी नहीं।
- पूनम चंद विश्नोईचौथी, नौवीं और दसवीं विधान सभा में प्रोटेम अध्यक्ष, 1967 से 1971 उपाध्यक्ष और 1980 से 1985 अध्यक्ष।
- भैरोंसिंह शेखावत11वीं विधान सभा के प्रोटेम अध्यक्ष और सातवीं, आठवीं व 11वीं में नेता प्रतिपक्ष।
- पुस्तकालय समितिअधिकतम दस सदस्य; पंद्रह की सीमा अधीनस्थ विधान और अनुसूचित जातियों के कल्याण जैसी समितियों की है।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
बीएसटीसी 2026 (प्रथम पारी) · प्रश्न 89
निम्न व्यक्तियों में से कौन राजस्थान विधान सभा के पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं रहे हैं?
- (1)नरोत्तम लाल जोशी
- (2)रामकिशोर व्यास
- (3)निरंजन नाथ आचार्य
- (4)गुलाब चंद कटारिया
उत्तर देखें
✓ (4) गुलाब चंद कटारिया
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंबीएसटीसी 2026 (प्रथम पारी) · प्रश्न 98
निम्न में से कौन कभी भी राजस्थान विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष नहीं रहे?
- (1)भैरों सिंह शेखावत
- (2)हरिदेव जोशी
- (3)वसुंधरा राजे
- (4)अशोक गहलोत
उत्तर देखें
✓ (4) अशोक गहलोत
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 62
राजस्थान विधान सभा के प्रथम प्रोटेम स्पीकर कौन थे?
- (1)महाराव संग्राम सिंह
- (2)नारायण सिंह मसुदा
- (3)पूनम चंद विश्नोई
- (4)यशवंत सिंह नाहर
उत्तर देखें
✓ (1) महाराव संग्राम सिंह
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 27
2022 के राष्ट्रपति के निर्वाचन में राजस्थान विधान-सभा के प्रत्येक सदस्य का मत-मूल्य था –
- (1)149
- (2)132
- (3)129
- (4)116
उत्तर देखें
✓ (3) 129
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2024 · प्रश्न 46
राजस्थान विधानसभा की पुस्तकालय समिति से सम्बन्धित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए – (I) पुस्तकालय समिति में सभापति को मिलाकर पन्द्रह से अधिक सदस्य नहीं होंगे। (II) पुस्तकालय समिति अध्यक्ष द्वारा मनोनीत की जायेगी और उसमें सदस्यों के कार्यकाल की अवधि एक वर्ष से अधिक नहीं होगी। सही उत्तर का चयन कीजिए –
- (1)न तो (I) ना ही (II) सही है।
- (2)केवल (II) सही है।
- (3)केवल (I) सही है।
- (4)(I) एवं (II) दोनों सही हैं।
उत्तर देखें
✓ (2) केवल (II) सही है।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2024 · प्रश्न 50
निम्नलिखित में से किस संवैधानिक संशोधन ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 171(1) में संशोधन करके यह प्रावधान किया कि राज्य विधान परिषद् के सदस्यों की कुल संख्या राज्य विधान सभा के कुल सदस्यों की संख्या के "एक–चौथाई" के बजाय "एक–तिहाई" से अधिक नहीं होगी?
- (1)30वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1972
- (2)51वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1984
- (3)15वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1963
- (4)7वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1956
उत्तर देखें
✓ (4) 7वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1956
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 27
निम्नलिखित में से राजस्थान विधान सभा में अधीनस्थ विधान संबंधी कौन सा कथन सही नहीं है ?
- (1)अधीनस्थ विधान समिति संविधान के प्रावधान या ऐसे आदेश बनाने के लिए अधीनस्थ प्राधिकारी को शक्ति सौंपने वाले कानून के प्रावधानों के अनुसरण में बनाए गए सभी "आदेशों" की जाँच करती है।
- (2)समिति उन विधेयकों के प्रावधानों की जाँच कर सकती है जो आदेश देने के लिए शक्तियों सौंपने की माँग करते हैं।
- (3)अध्यक्ष विधायी शक्तियों के प्रत्यायोजन के प्रावधान वाले विधेयकों को समिति को संदर्भित करता है।
- (4)यह राजस्थान विधान सभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 240 द्वारा शासित होता है।
उत्तर देखें
✓ (4) यह राजस्थान विधान सभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 240 द्वारा शासित होता है।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 19
भारत के राष्ट्रपति के चुनाव के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है ?
- (1)भारत के राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा किया जाता है जिसमें (ए) संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और (बी) राज्यों की विधान सभाओं और विधान सभा वाले केंद्रशासित प्रदेशों के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
- (2)निर्वाचक मंडल के प्रत्येक सदस्य के लिए वोट का मूल्य 1971 की जनसंख्या जनगणना के आधार पर तय किया जाता है और यह तब तक जारी रहेगा जब तक वर्ष 2026 के बाद पहली जनगणना की जनसंख्या प्रकाशित नहीं हो जाती है।
- (3)चुनाव एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार आयोजित किए जाते हैं।
- (4)किसी राज्य की विधान सभा के प्रत्येक निर्वाचित सदस्य के उतने मत होंगे जितने कि एक सौ के गुणित उस भागफल में हों जो राज्य की जनसंख्या को उस विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या से भाग देने पर आये।
उत्तर देखें
✓ (4) किसी राज्य की विधान सभा के प्रत्येक निर्वाचित सदस्य के उतने मत होंगे जितने कि एक सौ के गुणित उस भागफल में हों जो राज्य की जनसंख्या को उस विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या से भाग देने पर आये।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंपढ़ लिया? अब अभ्यास करें
निःशुल्क अभ्यास प्रश्नों से इस विषय पर अपनी तैयारी जाँचें।
अभ्यास प्रश्न →