एक नज़र में
- दो प्राधिकारी: अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करता है (अनुच्छेद 316(1)); उन्हें हटाता केवल राष्ट्रपति है (अनुच्छेद 317)।
- भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन दस वर्ष की सेवा: लगभग आधे सदस्यों के लिए आवश्यक, सभी के लिए नहीं (अनुच्छेद 316(1) परंतुक)।
- अनुशासनात्मक मामले: राज्य के सिविल सेवक से जुड़े सभी अनुशासनात्मक मामलों में आयोग से परामर्श अनिवार्य है (अनुच्छेद 320(3)(ग))।
तथ्य
| कानून | अनुच्छेद 315-323, भाग XIV, अध्याय 2 (लोक सेवा आयोग) |
|---|---|
| मुख्यालय | अजमेर |
| कार्यकाल | पद ग्रहण से छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो (अनुच्छेद 316(2)); पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं (316(3)) |
| त्यागपत्र | राज्यपाल को लिखित में (316(2)(क)) |
| संख्या व सेवा-शर्तें | राज्यपाल विनियमों से तय करता है; नियुक्ति के बाद सदस्य की सेवा-शर्तें उसके अहित में नहीं बदली जा सकतीं (अनुच्छेद 318) |
| व्यय | राज्य की संचित निधि पर भारित (अनुच्छेद 322), इसलिए विधानसभा के मतदान के लिए नहीं रखा जाता (अनुच्छेद 203(1)) |
| प्रतिवेदन | हर वर्ष राज्यपाल को; वह उसे अस्वीकृत सलाह के ज्ञापन सहित विधानमंडल के समक्ष रखता है (अनुच्छेद 323(2)) |
पद से हटाना और निलंबन (अनुच्छेद 317)
- कदाचार: राष्ट्रपति के संदर्भ पर सर्वोच्च न्यायालय की जाँच और हटाने के पक्ष में प्रतिवेदन के बाद हटाया जाता है।
- जिस सदस्य के बारे में ऐसा संदर्भ हुआ हो, उसे राज्यपाल राष्ट्रपति के आदेश तक निलंबित कर सकता है।
- दिवालिया घोषित होने, पद के बाहर वेतनभोगी नियोजन करने या शारीरिक/मानसिक अशक्तता पर राष्ट्रपति बिना जाँच भी हटा सकता है।
- सरकारी संविदा में हित या उसके लाभ में भागीदारी कदाचार मानी जाती है।
कार्य
- अनुच्छेद 320(1): राज्य की सेवाओं में नियुक्ति के लिए परीक्षाएँ आयोजित करना।
- अनुच्छेद 320(3): अनुशासनात्मक मामलों के अलावा भर्ती की पद्धतियों, नियुक्ति, पदोन्नति और स्थानांतरण के सिद्धांतों, कर्तव्य में किए कार्यों पर कानूनी कार्यवाही के खर्च के दावों और क्षति-पेंशन के दावों पर भी परामर्श।
- राज्यपाल उन विषयों के विनियम बना सकता है जिन पर परामर्श आवश्यक नहीं; वे कम से कम चौदह दिन विधानमंडल के समक्ष रखे जाते हैं (320(3) परंतुक, 320(5))।
- अनुच्छेद 321: राज्य विधानमंडल का अधिनियम आयोग को अतिरिक्त कार्य दे सकता है, स्थानीय प्राधिकारियों के लिए भी।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- अनुच्छेद315 गठन · 316 नियुक्ति और कार्यकाल · 317 हटाना · 318 विनियम · 319 बाद के पद · 320 कार्य · 321 अतिरिक्त कार्य · 322 व्यय · 323 प्रतिवेदन।
- बाद के पद (अनुच्छेद 319)अध्यक्ष संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष या सदस्य अथवा किसी अन्य राज्य आयोग का अध्यक्ष बन सकता है, पर अन्य सरकारी नियोजन नहीं।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 32
राजस्थान लोक सेवा आयोग के संबंध में निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए : (i) आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य राजस्थान के राज्यपाल द्वारा नियुक्त होते हैं । (ii) आयोग के अध्यक्ष या कोई अन्य सदस्य केवल राष्ट्रपति की आज्ञा से अपने पद से हटाए जा सकते हैं ।
- (1)न तो (i) न ही (ii) सही है ।
- (2)(i) व (ii) दोनों सही हैं ।
- (3)केवल (ii) सही है ।
- (4)केवल (i) सही है ।
उत्तर देखें
✓ (2) (i) व (ii) दोनों सही हैं ।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 32
संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राजस्थान सरकार के अधीन सेवारत व्यक्ति को प्रभावित करने वाले अनुशासनात्मक मामलों पर राजस्थान लोक सेवा आयोग से अनिवार्य परामर्श का प्रावधान है ?
- (1)अनुच्छेद 320(3)
- (2)अनुच्छेद 318(1)
- (3)अनुच्छेद 322(2)
- (4)अनुच्छेद 325(4)
उत्तर देखें
✓ (1) अनुच्छेद 320(3)
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (सीनियर सैकण्डरी स्तर) 2024 · प्रश्न 48
राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति निम्नलिखित में से किस के द्वारा की जाती है?
- (1)मुख्यमंत्री
- (2)राज्यपाल
- (3)उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
- (4)अध्यक्ष यू पी एस सी
उत्तर देखें
✓ (2) राज्यपाल
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2024 · प्रश्न 48
राजस्थान लोक सेवा आयोग से सम्बन्धित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये – (I) राजस्थान लोक सेवा आयोग के सभी सदस्य ऐसे व्यक्ति होते हैं जो अपनी–अपनी नियुक्ति की तारीख पर भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक पद धारण कर चुके हैं। (II) राजस्थान लोक सेवा आयोग के व्यय राजस्थान राज्य की संचित निधि पर भारित हैं। सही विकल्प चुनिये –
- (1)न तो (I) ना ही (II) सही है।
- (2)(I) एवं (II) दोनों सही हैं।
- (3)केवल (II) सही है।
- (4)केवल (I) सही है।
उत्तर देखें
✓ (3) केवल (II) सही है।
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