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राजस्थान का उच्च न्यायालय, अधीनस्थ न्यायालय एवं महाधिवक्ता

राज्य की न्यायपालिका और उसका विधि अधिकारी: जोधपुर में उच्च न्यायालय और उसकी जयपुर खंडपीठ, उसके अधीन न्यायालय तथा महाधिवक्ता।

⏱ 5 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 23 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. राजस्थान उच्च न्यायालय का उद्घाटन 29 अगस्त 1949 को उसकी प्रधान पीठ जोधपुर में हुआ; इसकी एक खंडपीठ जयपुर में भी है।
  2. प्रथम मुख्य न्यायाधीश: कमल कांत वर्मा (के.के. वर्मा), 29 अगस्त 1949 से 24 जनवरी 1950 तक।
  3. राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश (अनुच्छेद 217) · राज्यपाल द्वारा नियुक्त: जिला न्यायाधीश (अनुच्छेद 233) और महाधिवक्ता (अनुच्छेद 165)।

तीनों भाग एक नज़र में

भागअनुच्छेद
राजस्थान उच्च न्यायालयअनुच्छेद 214–231 (भाग VI, अध्याय V)
अधीनस्थ न्यायालयअनुच्छेद 233–237 (भाग VI, अध्याय VI)
महाधिवक्ताअनुच्छेद 165

राजस्थान उच्च न्यायालय

स्वीकृत संख्या (1 अक्टूबर 2026)50 न्यायाधीश: 38 स्थायी, 12 अतिरिक्त
मुख्य न्यायाधीश (23 अक्टूबर 2026 तक)संजय के. अग्रवाल, 7 सितंबर 2026 से

एक समिति ने 27 मार्च 1949 की रिपोर्ट में नए राज्य की राजधानी जयपुर और उच्च न्यायालय जोधपुर में रखने की सलाह दी। इसके बाद राजस्थान उच्च न्यायालय अध्यादेश, 1949 ने जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर और अलवर में चल रहे पाँच उच्च न्यायालयों के स्थान पर पूरे राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय बनाया। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता राजप्रमुख महाराजा सवाई मानसिंह ने की, जिसमें मुख्य न्यायाधीश और 11 अन्य न्यायाधीशों ने शपथ ली।

पीठ और जयपुर खंडपीठ: वर्ष

वर्षक्या हुआ
1949जोधपुर के अतिरिक्त जयपुर और उदयपुर में भी बैठकें; 3 सितंबर 1949 से बीकानेर और कोटा में भी, केवल वहाँ लंबित मामलों के लिए
195022 मई 1950 से बीकानेर, कोटा और उदयपुर की बैठकें समाप्त; जयपुर पीठ चलती रही
1956राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (धारा 49) से राजस्थान का नया उच्च न्यायालय; राष्ट्रपति ने 1 नवंबर 1956 से जोधपुर को प्रधान पीठ घोषित किया और उसी दिन जयपुर में अस्थायी पीठ बनी
1958जयपुर पीठ समाप्त; 26 फरवरी 1958 की समिति रिपोर्ट ने प्रधान पीठ जोधपुर और राजधानी जयपुर में ही रखने की सिफारिश की थी
1976–77राष्ट्रपति के 8 दिसंबर 1976 के आदेश से जयपुर में स्थायी खंडपीठ; 31 जनवरी 1977 से पुनः स्थापित

उच्च न्यायालयों पर संविधान के प्रावधान

अनुच्छेदप्रावधान
214प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय
215अभिलेख न्यायालय; अपने अवमान को दंडित करने की शक्ति
216एक मुख्य न्यायाधीश तथा राष्ट्रपति जितने आवश्यक समझें उतने अन्य न्यायाधीश
217(1)न्यायाधीश की नियुक्ति से पहले राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल तथा (मुख्य न्यायाधीश से भिन्न न्यायाधीश के लिए) उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करता है
217(1), 224(3)न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद पर रहता है
217(2)योग्यता: भारत का नागरिक; 10 वर्ष न्यायिक पद या 10 वर्ष उच्च न्यायालय का अधिवक्ता
217(3)न्यायाधीश की आयु का प्रश्न राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके तय करता है; उसका निर्णय अंतिम
219राज्यपाल या उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति के समक्ष शपथ
224अतिरिक्त न्यायाधीश अधिकतम दो वर्ष के लिए; कार्यकारी न्यायाधीश
226रिट: बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार पृच्छा, उत्प्रेषण; भाग III के अधिकारों तथा अन्य प्रयोजन के लिए
227अपने क्षेत्र के सभी न्यायालयों एवं अधिकरणों पर अधीक्षण, सशस्त्र बलों से संबंधित विधि के अधीन गठित न्यायालयों-अधिकरणों को छोड़कर (खंड 4)
229अधिकारियों-कर्मचारियों की नियुक्ति मुख्य न्यायाधीश करता है; प्रशासनिक व्यय राज्य की संचित निधि पर भारित

99वें संशोधन (2014) ने अनुच्छेद 217, 222, 224, 224A और 231 में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) जोड़ा; उच्चतम न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2015 को इसे रद्द कर दिया, इसलिए ऊपर दी गई पहले की परामर्श वाली शब्दावली लागू है।

अधीनस्थ न्यायालय

  • अनुच्छेद 233: जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदस्थापन और पदोन्नति उच्च न्यायालय से परामर्श करके होती है; सेवा में न रहे व्यक्ति के लिए कम से कम सात वर्ष अधिवक्ता या प्लीडर होना और उच्च न्यायालय की सिफारिश आवश्यक।
  • अनुच्छेद 234: जिला न्यायाधीशों से भिन्न न्यायिक सेवा के पद राज्यपाल द्वारा, राज्य लोक सेवा आयोग एवं उच्च न्यायालय से परामर्श करके बनाए नियमों के अनुसार भरे जाते हैं।
  • अनुच्छेद 235: जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण उच्च न्यायालय में निहित।
  • अनुच्छेद 236: "जिला न्यायाधीश" में अन्य के साथ अपर जिला न्यायाधीश, सेशन, अपर सेशन, सहायक सेशन न्यायाधीश और नगर सिविल न्यायालय के न्यायाधीश सम्मिलित हैं।
  • अनुच्छेद 237: राज्यपाल मजिस्ट्रेटों के कुछ वर्गों पर यह अध्याय लागू कर सकता है।

31 दिसंबर 2022 को राज्य न्यायपालिका में 36 जजशिप थीं (इनमें जयपुर मेट्रो-I, जयपुर मेट्रो-II और जोधपुर महानगर भी), और न्यायालय तीन संवर्गों में: जिला न्यायाधीश, वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश और सिविल न्यायाधीश। 36 में से 19 प्रधान पीठ जोधपुर के और 17 जयपुर खंडपीठ के क्षेत्राधिकार में थीं।

महाधिवक्ता

  • अनुच्छेद 165: महाधिवक्ता में उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता होनी चाहिए।
  • कर्तव्य: राज्य सरकार को विधिक विषयों पर सलाह देना और राज्यपाल द्वारा सौंपे अन्य विधिक कार्य करना।
  • वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है; पारिश्रमिक राज्यपाल निर्धारित करता है।
  • अनुच्छेद 177: महाधिवक्ता विधानसभा की और उसकी जिस समिति का वह सदस्य नामित हो उसकी कार्यवाही में बोल सकता और भाग ले सकता है, पर मत नहीं दे सकता।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • पीठजोधपुर, प्रधान पीठ · जयपुर, खंडपीठ, जो अजमेर और कोटा जिलों के मामले भी सुनती है।
  • सेवानिवृत्ति आयुउच्च न्यायालय के न्यायाधीश, 62 वर्ष · उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश, 65 वर्ष।
  • विधि अधिकारीमहाधिवक्ता, अनुच्छेद 165, राज्य का · भारत का महान्यायवादी, अनुच्छेद 76, संघ का।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 123

राजस्थान उच्च न्यायालय की मुख्य सीट (प्रिन्सिपल सीट ) कहाँ स्थित है?

  1. (1)बाड़मेर
  2. (2)अजमेर
  3. (3)कोटा
  4. (4)जोधपुर
उत्तर देखें

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 28

संविधान के अनुच्छेद 217(1) के अनुसार, राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति से भिन्न किसी न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति किसके परामर्श उपरांत करेगा ?

  1. (1)राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति, भारत के महान्यायवादी तथा राजस्थान के राज्यपाल ।
  2. (2)राजस्थान के राज्यपाल, भारत के मुख्य न्यायमूर्ति तथा राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति ।
  3. (3)संघ के कानून एवं न्याय मंत्री तथा राजस्थान के राज्यपाल ।
  4. (4)भारत के मुख्य न्यायमूर्ति तथा राजस्थान के राज्यपाल ।
उत्तर देखें

✓ (2) राजस्थान के राज्यपाल, भारत के मुख्य न्यायमूर्ति तथा राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति ।

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

संरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 18

भारत में उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की आयु के बारे में कोई प्रश्न उठता है तो उसका विनिश्चय कौन करता है ?

  1. (1)उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से राज्यपाल द्वारा।
  2. (2)भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से राष्ट्रपति द्वारा।
  3. (3)राष्ट्रपति के परामर्श से भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा।
  4. (4)राज्यपाल के परामर्श से भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा।
उत्तर देखें

✓ (2) भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से राष्ट्रपति द्वारा।

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