प्रश्न 1
'पृथ्वीराज रासो' की रचना किसने की?
- (1)नरपति नाल्ह
- (2)सूर्यमल्ल मिश्रण
- (3)चन्दबरदाई✓ सही उत्तर
- (4)पद्मनाभ
उत्तर: (3) चन्दबरदाई
व्याख्या
पृथ्वीराज चौहान के जीवन का वर्णन करने वाला पृथ्वीराज रासो उनके दरबारी कवि चन्दबरदाई की रचना है।
20 प्रश्नव्याख्या सहितआरएएस, पटवारी, वीडीओ एवं राजस्थान की अन्य परीक्षाओं के लिए
'पृथ्वीराज रासो' की रचना किसने की?
उत्तर: (3) चन्दबरदाई
व्याख्या
पृथ्वीराज चौहान के जीवन का वर्णन करने वाला पृथ्वीराज रासो उनके दरबारी कवि चन्दबरदाई की रचना है।
मीराबाई किसकी भक्त थीं?
उत्तर: (4) भगवान कृष्ण
व्याख्या
मीराबाई भगवान कृष्ण (गिरधर गोपाल) को अपना प्रियतम मानती थीं और उन्होंने उनकी भक्ति में पदों की रचना की।
विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना किसने की?
उत्तर: (1) जाम्भोजी
व्याख्या
संत जाम्भोजी ने विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की, जिसके अनुयायी पेड़ों व जीवों की रक्षा सहित 29 नियमों का पालन करते हैं।
'एनाल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान' की रचना किसने की?
उत्तर: (2) कर्नल जेम्स टॉड
व्याख्या
पश्चिमी राजपूताना के पॉलिटिकल एजेंट कर्नल जेम्स टॉड ने 'एनाल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान' लिखी।
किस संत को 'राजस्थान का कबीर' कहा जाता है?
उत्तर: (3) दादू दयाल
व्याख्या
नरायणा में प्रमुख पीठ वाले दादू पंथ के संस्थापक दादू दयाल को उनकी निर्गुण शिक्षाओं के कारण राजस्थान का कबीर कहा जाता है।
संत बनने से पूर्व संत पीपा कहाँ के शासक थे?
उत्तर: (4) गागरोण
व्याख्या
गागरोण के खींची चौहान शासक पीपा ने राजपाट त्यागकर रामानंद का शिष्यत्व ग्रहण किया।
'वागड़ी' बोली मुख्य रूप से राजस्थान के किस क्षेत्र में बोली जाती है?
उत्तर: (1) डूंगरपुर–बांसवाड़ा
व्याख्या
वागड़ी डूंगरपुर और बांसवाड़ा को मिलाकर बने वागड़ क्षेत्र की बोली है।
'वंश भास्कर' की रचना किसने की?
उत्तर: (2) सूर्यमल्ल मिश्रण
व्याख्या
बूँदी के राजकवि सूर्यमल्ल मिश्रण ने बूँदी के शासकों के इतिहास पर आधारित 'वंश भास्कर' की रचना की।
संत रामचरणजी द्वारा स्थापित रामस्नेही सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ कहाँ है?
उत्तर: (3) शाहपुरा
व्याख्या
रामचरणजी ने रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना की जिसकी प्रमुख पीठ शाहपुरा में है; नरायणा, कतरियासर और मुकाम अन्य सम्प्रदायों की पीठ हैं।
'राजपूताने का अबुल फजल' किसे कहा जाता है?
उत्तर: (4) मुहणोत नैणसी
व्याख्या
'नैणसी री ख्यात' और 'मारवाड़ रा परगना री विगत' के लेखक मुहणोत नैणसी को मुंशी देवीप्रसाद ने राजपूताने का अबुल फजल कहा।
ब्रजभाषा मिश्रित राजस्थानी की वह साहित्यिक शैली, जिसका प्रयोग मुख्यतः भाट कवियों ने किया, कहलाती है:
उत्तर: (1) पिंगल
व्याख्या
पिंगल ब्रज-प्रभावित साहित्यिक राजस्थानी है जिसे भाटों ने अपनाया, जबकि डिंगल चारणों की पश्चिमी राजस्थानी शैली है।
'वेलि क्रिसन रुकमणी री' की रचना किसने की?
उत्तर: (2) पृथ्वीराज राठौड़
व्याख्या
अकबर के दरबारी बीकानेर के पृथ्वीराज राठौड़ ने यह डिंगल कृति रची; दुरसा आढ़ा ने इसे 'पाँचवाँ वेद' कहा।
दादू पंथ की प्रमुख पीठ कहाँ है?
उत्तर: (2) नरायणा
व्याख्या
संत दादूदयाल ने अंतिम वर्ष नरायणा में बिताए; यही दादू पंथ की प्रमुख पीठ है।
जसनाथ जी द्वारा प्रवर्तित जसनाथी संप्रदाय की प्रमुख पीठ कहाँ है?
उत्तर: (1) कतरियासर
व्याख्या
बीकानेर जिले का कतरियासर जसनाथी संप्रदाय की प्रमुख पीठ है।
बीकानेर जिले का मुकाम (तालवा), जहाँ जाम्भोजी की समाधि है, किस संप्रदाय का प्रमुख तीर्थ है?
उत्तर: (3) बिश्नोई
व्याख्या
जाम्भोजी की समाधि वाला मुकाम बिश्नोई संप्रदाय का प्रमुख तीर्थ है, जहाँ फाल्गुन व आश्विन अमावस्या को मेला भरता है।
रामस्नेही संप्रदाय की पीठ और उसके संस्थापक का कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
उत्तर: (4) रैण – दरियाव जी
व्याख्या
रैण (नागौर) शाखा दरियाव जी ने, शाहपुरा रामचरण जी ने, सिंहथल हरिरामदास जी ने तथा खेड़ापा रामदास जी ने स्थापित की।
मीराबाई का विवाह किसके साथ हुआ था?
उत्तर: (3) राणा सांगा के पुत्र भोजराज
व्याख्या
कुड़की (मेड़ता क्षेत्र) के रतनसिंह राठौड़ की पुत्री मीरा का विवाह राणा सांगा के ज्येष्ठ पुत्र भोजराज से हुआ।
राजस्थानी की 'हाड़ौती' बोली मुख्यतः किस क्षेत्र में बोली जाती है?
उत्तर: (1) कोटा–बूँदी–बाराँ–झालावाड़
व्याख्या
हाड़ौती, हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बूँदी, बाराँ, झालावाड़) की बोली है।
इस क्षेत्र की भाषा के लिए 'राजस्थानी' नाम का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया?
उत्तर: (2) जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन
व्याख्या
जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने 'लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया' में सर्वप्रथम इस भाषा के लिए 'राजस्थानी' नाम का प्रयोग किया। इससे पहले जेम्स टॉड ने इस क्षेत्र के लिए 'राजस्थान' नाम को प्रचलित किया था।
'दयालदास री ख्यात' (दयालदास सिंढायच कृत) मुख्यतः कहाँ के राठौड़ों का इतिहास बताती है?
उत्तर: (3) बीकानेर
व्याख्या
दयालदास सिंढायच ने बीकानेर के महाराजा रतनसिंह के समय बीकानेर के राठौड़ों की ख्यात लिखी।