- प्रश्न
- 30
- समय
- 30 मिनट
- अंक
- 30
टेस्ट के दौरान भी भाषा बदल सकते हैं।
+1 सही · कोई ऋणात्मक अंकन नहीं · छोड़ने के लिए E चुनें · समय पूरा होने पर अपने-आप सबमिट।
सभी नियम
शुरू करने से पहले
- सही उत्तर पर +1, कोई ऋणात्मक अंकन नहीं। प्रश्न छोड़ने के लिए E चुनें।
- रैंक के लिए केवल आपका पहला प्रयास गिना जाएगा। बाद में अभ्यास के लिए इसे दोबारा दे सकते हैं।
- समय पूरा होने पर टेस्ट अपने-आप सबमिट हो जाएगा। आपके उत्तर साथ-साथ सेव होते रहते हैं और पेज छोड़ने पर भी समय चलता रहता है, इसलिए समय पूरा होने से पहले किसी भी डिवाइस पर लौटकर टेस्ट जारी रख सकते हैं।
- टेस्ट के दौरान कभी भी हिंदी और English के बीच बदल सकते हैं।
- कुल अंक: 30 (प्रति प्रश्न 1)
- समय: 30 मिनट। समय पूरा होने पर टेस्ट अपने-आप सबमिट हो जाएगा।
- कोई ऋणात्मक अंकन नहीं
- हर प्रश्न में 5वाँ विकल्प (E) “प्रश्न हल नहीं किया” है। उत्तर न देना हो तो E चुनें।
- 10% से अधिक प्रश्नों में कोई भी विकल्प न चुनने (E भी नहीं) पर आपके परिणाम में यह दिखाया जाएगा — असली परीक्षा में इस पर दंड लगता है।
30 मिनट में 30 प्रश्न, वास्तविक रीट की गति (हर प्रश्न के लिए 1 मिनट)। गलत उत्तर पर कोई अंक नहीं कटता। वास्तविक रीट में किसी प्रश्न का कोई भी विकल्प न भरने पर 1/3 अंक कटता है; यहाँ उसे 0 अंक मिलेंगे। जो प्रश्न छोड़ें उसके लिए विकल्प E भरें।
रैंक के लिए केवल आपका पहला प्रयास गिना जाएगा।
नमूना प्रश्न
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न-संख्या 51 से 58 तक के उत्तर दीजिए । अधिकतर लोग विष्णु को पालनकर्त्ता मानकर उनकी उपासना करते हैं; विष्णु पालन करते हैं तथा महेश संहार करते हैं । इस पर विश्वास करके यदि कृषक को ही विष्णु कहें तो कोई अतिशयोक्ति न होगी । आकाश में उड़ने वाले स्वतंत्र पक्षी, पृथ्वी पर विचरण करने वाला मानव, यहाँ तक कि जलचर भी कृषकों पर ही निर्भर है । तपस्या भरा त्याग, अभिमान रहित उदारता और क्लांति रहित परिश्रम का यदि चित्र देखना है तो आप भारतीय कृषक को देखिए । वह स्वयं न खाकर दूसरों को खिलाता है, स्वयं न पहनकर दूसरों को वस्त्र देता है । उसके अनुपम त्याग की समानता कोई नहीं कर सकता है । भारतीय कृषक की आकृति में ऐसा प्रतीत होता है कि मानों कोई वीतराग संन्यासी हो । जिसे न दुःख में दुःख और न सुख में सुख की कामना है; जिसे न अज्ञान से आत्म-ग्लानि होती है और न दरिद्रता से दीनता । यह वह कर्मयोगी है जो फल प्राप्ति की इच्छा से रहित होकर कर्म में तल्लीन रहता है । ‘तल्लीन’ शब्द का सही ‘सन्धि-विच्छेद’ होगा
- Aतल् + लीन
- Bतत् + लीन
- Cतः + लीन
- Dत + ल्लीन
केवल नमूना। इस टेस्ट के अपने प्रश्न शुरू करने पर खुलेंगे।